एनजीटी ने मसूरी झील से पानी की अनियमित निकासी को लेकर मांगी रिपोर्ट
नई दिल्ली, बुधवार, 25 मई 2022। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने उत्तराखंड के मसूरी में निजी होटलों द्वारा मसूरी झील का पानी अनियमित रूप से निकाले जाने को लेकर दो महीने के भीतर एक रिपोर्ट मांगी है। एनजीटी अध्यक्ष न्यायमूर्ति ए. के. गोयल की अध्यक्षता वाली पीठ ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि झील से पानी की अनियंत्रित निकासी निश्चित रूप से प्राकृतिक जल चक्र और इसके द्वारा किए जाने वाले पर्यावरणीय कार्यों को प्रभावित कर सकती है। एनजीटी ने मसूरी में होटल जेपी रेजीडेंसी और अन्य होटलों द्वारा मसूरी झील से पानी की अनियमित निकासी के खिलाफ कार्तिक शर्मा द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई के दौरान यह बात कही। एनजीटी ने कहा, ‘हमने मामले पर विचार किया है। झील से पानी की अनियंत्रित निकासी निश्चित रूप से प्राकृतिक जल चक्र और झील द्वारा किए जाने वाले पर्यावरणीय कार्यों को प्रभावित कर सकती है। झील की मदद से जलीय और अर्ध जलीय पौधों तथा जानवरों के लिए भूमिगत जलीय पर्यावास का पुनर्भरण तथा पानी की गुणवत्ता बनी रहती है।’
पीठ में न्यायमूर्ति गोयल के अलावा न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल और अरुण कुमार त्यागी भी शामिल हैं। एनजीटी ने कहा, ‘इसलिए मामले की तथ्यात्मक स्थिति और वैधानिक नियामकों द्वारा की गई कार्रवाई का पता लगाना आवश्यक प्रतीत होता है।’ राष्ट्रीय हरित अधिकरण ने इस मामले को लेकर एक समिति गठित की है, जिसमें केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, देहरादून के जिलाधिकारी और राज्य आर्द्रभूमि प्राधिकरण के अधिकारी भी शामिल हैं। तथ्यात्मक जानकारी और समिति की कार्रवाई की रिपोर्ट दो महीने के भीतर ई-मेल द्वारा एनजीटी के समक्ष पेश की जा सकती है। इस मामले की अगली सुनवाई 25 जुलाई को होगी।
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