85 वर्ष के हुये मनोज कुमार

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बॉलीवुड के जानेमाने अभिनेता मनोज कुमार आज 85 वर्ष के हो गये।मनोज कुमार मूल नाम हरिकिशन गिरी गोस्वामी का जन्म 24 जुलाई 1937 में हुआ था ।जब वह महज दस वर्ष के थे तब उनका पूरापरिवार राजस्थान के हनमुनगढ़ जिले में आकर बस गया ।बचपन के दिनों में मनोज कुमार ने दिलीप कुमार अभिनीत फिल्म ..शबनम ..देखी थी । फिल्म में दिलीप कुमार के निभाये किरदार से मनोज कुमार इस कदर प्रभावित हुये कि उन्होंने भी फिल्म अभिनेता बनने का फैसला कर लिया । मनोज कुमार ने अपनी स्नातक की शिक्षा दिल्ली के मशहूर हिंदू कॉलेज से पूरी की ।इसके बाद बतौर अभिनेता बनने का सपना लेकर वह मुंबई आ गये ।बतौर अभिनेता मनोज कुमार ने अपने सिने करियर की शुरूआत वर्ष 1957 में प्रदर्शित फिल्म ..फैशन ..से की। फिल्म में मनोज कुमार ने छोटी सी भूमिका निभायी थी।

वर्ष 1957 से 1962 तक मनोज कुमार फिल्म इंडस्ट्री मे अपनी जगह बनाने के लिये संघर्ष करते रहे । फिल्म .फैशन.के बाद उन्हें जो भी भूमिका मिली वह उसे स्वीकार करते चले गये । इस बीच उन्होंने कांच की गुडि़या .रेशमी रूमाल .सहारा .पंयायत .सुहाग सिंदूर .हनीमून ..पिया मिलन की आस जैसी कई बी ग्रेड फिल्मों मे अभिनय किया लेकिन इनमें से कोई भी फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सफल नहीं हुयी । निर्माता-निर्देशक विजय भटृ की वर्ष1962 में प्रदर्शित क्लासिक फिल्म ..हरियाली और रास्ता .. से चमका ।फिल्म में मनोज कुमार के अपोजिट माला सिन्हा थी।मनोज कुमार और माला सिन्हा की जोड़ी को दर्शकों ने बेहद पसंद किया। वर्ष 1964 में मनोज कुमार की एक और सुपरहिट फिल्म ..वह कौन थी ..प्रदर्शित हुयी ।फिल्म में उनकी नायिका की भूमिका साधना ने निभायी ।रहस्य और रोमांच से भरपूर इस फिल्म में साधना की रहस्यमय मुस्कान के दर्शक दीवाने हो गये।

वर्ष 1965 में ही मनोज कुमार की एक और सुपरहिट फिल्म गुमनाम भी प्रदर्शित हुयी। इस फिल्म में रहस्य और रोमांस के ताने.बानेसे बुनी. मधुर गीत.संगीत और ध्वनि के कल्पनामय इस्तेमाल किया गया था। वर्ष 1965 में ही मनोज कुमार को विजय भटृ की फिल्म ..हिमालय की गोद में काम करने का मौका मिला जो टिकट खिड़की पर सुपरहिट साबित हुयी1इस फिल्म में भी मनोज कुमार की नायिका माला सिन्हा थी। वर्ष 1965 में प्रदर्शित फिल्म ..शहीद ..मनोज कुमार के सिने करियर की महत्वपूर्ण फिल्मों में शुमार की जाती है ।देशभक्ति के जज्बे से परिपूर्ण इस फिल्म में मनोज कुमार ने भगत सिंह की भूमिका को रूपहले पर्दे पर जीवंत कर दिया ।फिल्म से जुड़ा दिलचस्प तथ्य है कि मनोज कुमार के ही कहने पर गीतकार प्रेम धवन ने न इस फिल्म के गीत लिखे साथ ही फिल्म का संगीत भी दिया ।उनके रचित गीत..ऐ मेरे प्यारे वतन.. और ..मेरा रंग दे बसंती चोला.. आज भी उसी तल्लीनता से सुने जाते हैं. जिस तरह उस दौर में सुने जाते थे ।

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