41 मंगलवार दर्शन करने पर मन्नत पूरी कर देती हैं माता विशालाक्षी

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नवरात्रि का पर्व आने वाला है, उससे पहले हम आपको बताने जा रहे हैं माता विशालाक्षी के बारे में। विशालाक्षी शक्तिपीठ हिन्दू धर्म के प्रसिद्द 52 शक्तिपीठों में एक है। जी हाँ और हिन्दू मान्यता के अनुसार, यहां देवी सती के दाहिने कान के कुंडल गिरे थे। जी हाँ और यह मंदिर वारणसी के प्रसिद्ध काशी विश्वनाथ मंदिर से कुछ ही दूरी पर मीरघाट पर स्थित है। कहते हैं यहां आने वाले श्रद्धालु विशालाक्षी को मणिकर्णी के नाम से भी जानते हैं। जी दरअसल विशालाक्षी शक्तिपीठ के बारे में कहा जाता है कि यह देवी 41 मंगलवार में आपकी हर मुराद पूरी कर देती हैं।

आप सभी को बता दें कि विशालाक्षी शक्तिपीठ की शक्ति विशालाक्षी माता और भैरव ‘काल भैरव’ हैं। जी हाँ और यहां देवी के कान के मणि गिरे थे इसलिए इस जगह को मणिकर्णिका घाट भी कहा जाता है। वहीं स्कंद पुराण के अनुसार, जब ऋषि व्यास को वाराणसी में कोई भी भोजन अर्पण नहीं कर रहा था, तब विशालाक्षी एक गृहिणी की भूमिका में प्रकट हुईं और ऋषि व्यास को भोजन दिया। जी दरअसल विशालाक्षी की भूमिका बिलकुल ‘अन्नपूर्णा’ के समान थी और ऐसा माना जाता है कि विशालाक्षी मां ही अन्नपूर्णा देवी हैं, जिनके आशीर्वाद से संसार के समस्त जीव भोजन प्राप्त करते हैं।

कहा जाता है देवी सती के शरीर के कोई अंग या आभूषण, जो भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र से काटे जाने पर पृथ्वी पर गिरे, वह स्थान शक्तिपीठ कहलाए। वहीं अगर स्कंद पुराण की माने तो इसके अनुसार, विशालाक्षी नौ गौरियों में पंचम हैं तथा भगवान श्री काशी विश्वनाथ उनके मंदिर के समीप ही विश्राम करते हैं।

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