बिना मंजूरी के नोएडा में निर्माण परियोजनाओं पर काम नहीं होगा: एनजीटी
नई दिल्ली, शुक्रवार, 13 दिसम्बर 2024। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने निर्देश दिया है कि ग्रेटर नोएडा और नोएडा में जिन निर्माण परियोजनाओं के पास जरूरी मंजूरी नहीं है, उन्हें निर्माण गतिविधियों को आगे बढ़ाने की अनुमति नहीं दी जाएगी। एनजीटी ग्रेटर नोएडा और नोएडा में पर्यावरण मानदंडों का उल्लंघन कर आवासों, दुकानों और अन्य वाणिज्यिक परिसरों के कथित अनधिकृत और अवैध निर्माण के संबंध में एक याचिका पर सुनवाई कर रहा था। याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि कुछ रियल एस्टेट कारोबारी अवैध रूप से ऊपरी मिट्टी निकाल रहे हैं और इसके अलावा वे अनधिकृत बोरवेल भी करवा रहे हैं।
एनजीटी अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव की पीठ ने नौ दिसंबर के एक आदेश में कहा, ‘‘संबंधित अधिकारियों ने अपने जवाब दाखिल किए हैं, जिनसे पता चलता है कि कुछ परियोजना प्रस्तावक (रियल एस्टेट कंपनी) स्थापना की सहमति (सीटीई), संचालन की सहमति (सीटीओ) और पर्यावरण मंजूरी (ईसी) प्राप्त किए बिना निर्माण कार्य जारी रखे हुए हैं।’’ पीठ ने कहा कि पर्यावरणीय मानदंडों का पालन किए बिना बड़े पैमाने पर अवैध निर्माण कार्य के मद्देनजर सुनवाई की अगली तारीख तक, राज्य और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के संबंधित अधिकारी यह सुनिश्चित करेंगे कि ईसी/सीटीई/सीटीओ की आवश्यकता वाली किसी भी परियोजना को, इन मंजूरियों के बिना, निर्माण कार्य जारी रखने की अनुमति नहीं दी जाए। पीठ में न्यायिक सदस्य न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल और विशेषज्ञ सदस्य ए सेंथिल वेल भी शामिल थे।
एनजीटी ने उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को डूब क्षेत्र के इलाकों में अवैध तरीके से भूखंड की खरीद बिक्री को रोकने का भी निर्देश दिया। कार्यवाही के दौरान याचिकाकर्ता के वकील आकाश वशिष्ठ ने दलील दी कि ग्रेटर नोएडा के एक बड़े हिस्से में अवैध टाउनशिप, विला और अपार्टमेंट हैं। उन्होंने कहा, ‘‘हमने रिकॉर्ड पर व्यापक सामग्री पेश की है, जिससे पता चलता है कि किस तरह हर दिन बड़े-बड़े निर्माण कार्य हो रहे हैं। तस्वीरों से पता चलता है कि कैसे अवैध कॉलोनियों में बिजली के खंभे लगाए जा रहे हैं और अनिवार्य अनापत्ति प्रमाण-पत्र (एनओसी) के बिना बोरवेल खोदे जा रहे हैं।’’ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता और पूर्व नगर निगम पार्षद राजेंद्र त्यागी द्वारा दायर याचिका में ग्रेटर नोएडा के 56 गांवों और नोएडा के 18 गांवों में अनधिकृत कॉलोनियां और टाउनशिप होने का उल्लेख किया गया है।
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