हिन्दी कवि एवं उपन्यासकार विनोद कुमार शुक्ला को ज्ञानपीठ पुरस्कार देने की घोषणा
नई दिल्ली, शनिवार, 22 मार्च 2025। हिन्दी के प्रसिद्ध कवि एवं प्रख्यात कथाकार विनोद कुमार शुक्ला को 59वें ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किये जाने की शनिवार को घोषणा की गई। चर्चित उपान्यास 'नौकर की कमीज' और काव्यसंग्रह 'वह आदमी चला गया गरम कोट पहनकर विचार की तरह के लेखक 88 वर्षीय श्री शुक्ला को यह पुरस्कार उनके आजीवन लेखन के लिए दिया जा रहा है । ज्ञानपीठ चयन समिति की बैठक के बाद जारी आधिकारिक बयान में कहा गया है कि श्री शुक्ल को इस पुरस्कार के अंतर्गत 11 लाख रुपए की नकद राशि, स्मृति चिह्न, प्रशस्ति पत्र तथा वाग्देवी की प्रतिमा प्रदान की जायेगी।
छत्तीसगढ़ के रायपुर में कृषि काॅलेज से सेवानिवृत्त श्री शुक्ला को उनके दूसरे उपन्यास 'दीवार में खिड़की रहा करती थी' के लिए 1999 में साहित्य अकादमी पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है। वह साहित्य अकादमी के शोधकर्ता भी हैं। शुक्ला ने सातवें दशक में अपना लेखन शुरू किया था और अपने पहले कविता संग्रह 'वह आदमी चला गया गरम कोट पहनकर विचार की तरह' से हिंदी में चर्चित हुए थे। इससे पहले 1971 में उनकी काव्य पुस्तिका 'लगभग जय हिंद' नाम से अशोक वाजपेयी द्वारा संपादित 'पहचान' शृंखला में छपी थी।
शुक्ला 1981 में प्रकाशित 'नौकर की कमीज' उपन्यास से साहित्य में स्थापित हुए थे। इस उपन्यास पर एक फ़िल्म भी बन चुकी है। राजनादगांव (अब छत्तीसगढ) में 01 जनवरी 1937 में जन्मे श्री शुक्ल ने जबलपुर से कृषि विज्ञान में स्नात्कोत्तर की उपाधि हासिल की थी और रायपुर में अध्यापन करने लगे थे।
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