ट्रंप की युद्ध संबंधी शक्तियों को सीमित करने का प्रस्ताव अमेरिकी सीनेट में ख़ारिज
वॉशिंगटन, गुरुवार, 05 मार्च 2026। ईरान के खिलाफ जारी सैन्य कार्रवाई के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की युद्ध संबंधी शक्तियों को सीमित करने का प्रस्ताव अमेरिकी सीनेट ने खारिज कर दिया है। 'वार पावर्स रेजोल्यूशन' को सीनेट में 53 बनाम 47 मतों से पारित किया गया, जिसमें अधिकांश सांसदों ने पार्टी लाइन के अनुसार मतदान किया। इस प्रस्ताव के तहत राष्ट्रपति को ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य अभियान जारी रखने से पहले कांग्रेस की अनुमति लेना अनिवार्य किया जाना था। यदि यह प्रस्ताव पारित हो जाता तो कांग्रेस की औपचारिक मंजूरी के बिना ईरान में आगे की सैन्य कार्रवाई प्रभावी रूप से रोक दी जाती। डेमोक्रेट पार्टी के अधिकांश सांसदों ने प्रस्ताव का समर्थन करते हुए कहा कि राष्ट्रपति ने सैन्य कार्रवाई शुरू करते समय कांग्रेस को दरकिनार किया और युद्ध के औचित्य पर स्पष्ट जानकारी नहीं दी। उनका कहना था कि लंबे युद्ध की संभावना वाले निर्णयों में सांसदों की सीधी भूमिका होनी चाहिए।
रिपब्लिकन पार्टी के अधिकांश सांसदों ने इसका विरोध करते हुए कहा कि चल रहे संघर्ष के दौरान राष्ट्रपति की शक्तियों को सीमित करना अमेरिका की रणनीतिक स्थिति को कमजोर कर सकता है। मतदान के दौरान दो सांसदों ने अपनी-अपनी पार्टी से अलग रुख अपनाया। पेनसिल्वेनिया के डेमोक्रेटिक सीनेटर जॉन फेटरमैन ने प्रस्ताव के खिलाफ मतदान किया, जबकि केंटकी के रिपब्लिकन सीनेटर रैंड पॉल ने इसका समर्थन किया। मध्यमार्गी रिपब्लिकन सुसान कॉलिन्स (मेन) और लीसा मर्कोव्स्की (अलास्का) ने भी प्रस्ताव के खिलाफ मतदान किया, हालांकि उन्होंने सैन्य अभियान को लेकर सावधानी बरतने की आवश्यकता पर जोर दिया। कॉलिन्स ने कहा कि प्रस्ताव पारित होने से ईरान को गलत संदेश जा सकता है और संघर्ष में शामिल अमेरिकी सैनिकों की स्थिति कमजोर पड़ सकती है।
यह प्रस्ताव वर्जीनिया के डेमोक्रेटिक सीनेटर टिम केन सहित कुछ सांसदों द्वारा पेश किया गया था और इसमें 1973 के वार पावर्स एक्ट के प्रावधानों का हवाला दिया गया था, जिसके तहत कांग्रेस सैन्य कार्रवाई समाप्त करने पर मतदान की मांग कर सकती है। सीनेट में मतदान से पहले डेमोक्रेटिक नेता चक शूमर ने कहा कि अमेरिकी जनता पश्चिम एशिया में लंबे युद्धों से थक चुकी है और किसी नये बड़े युद्ध में जल्दबाजी से बचना चाहिए। दूसरी ओर रिपब्लिकन नेताओं ने राष्ट्रपति के अधिकारों का बचाव करते हुए कहा कि कमांडर-इन-चीफ के रूप में राष्ट्रपति को कांग्रेस की औपचारिक युद्ध घोषणा के बिना भी सैन्य कार्रवाई का आदेश देने का अधिकार है।अमेरिका में यह बहस ऐसे समय हो रही है जब 28 फरवरी से शुरू हुए 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' के तहत अमेरिका और इज़रायल ने ईरान के कई ठिकानों पर हमले किये हैं। इसके जवाब में ईरान ने इज़रायल और खाड़ी क्षेत्र में अमेरिका के सहयोगी देशों को निशाना बनाते हुए हमले किये हैं। अमेरिकी युद्ध मामलों के मंत्री पीट हेगसेथ ने संकेत दिया है कि यह संघर्ष आठ सप्ताह या उससे अधिक समय तक चल सकता है, जो पहले बताई गयी समय-सीमा से अधिक हो सकता है।अमेरिकी कानून के अनुसार कोई भी सैन्य कार्रवाई शुरू होने के 48 घंटे के भीतर राष्ट्रपति को कांग्रेस को सूचित करना अनिवार्य है।
Similar Post
-
चीन ने तियानझोउ-10 कार्गो अंतरिक्ष यान को तियांगोंग अंतरिक्ष स्टेशन की ओर प्रक्षेपित किया
बीजिंग, सोमवार, 11 मई 2026। चीन ने सोमवार को तियानझोउ-10 कार्गो अं ...
-
तमाम तरह की स्वतंत्रता प्रेस की आजादी पर टिकी हैः एंटोनियो गुटेरेस
न्यूयॉर्क, रविवार, 03 मई 2026। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनिय ...
-
ट्रंप ने ईरान की घेराबंदी जारी रखने का आदेश दिया
वाशिंगटन, बुधवार, 29 अप्रैल 2026। अमेरिका और ईरान के बीच बात ठप ह ...
