अदालत ने दस्तावेज मांगने संबंधी लालू की याचिका खारिज की
नई दिल्ली, गुरुवार, 19 मार्च 2026। दिल्ली की एक अदालत ने कथित रूप से 'जमीन लेकर नौकरी देने' के मामले के अपनी दलीलें तैयार करने के लिए 1,600 से अधिक 'अनरिलायड' दस्तावेज उपलब्ध कराने का अनुरोध करने वाली पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव और उनकी पत्नी राबड़ी देवी की याचिकाएं खारिज कर दीं। 'अनरिलायड' दस्तावेज वे सामग्री होती हैं जिन्हें जांच एजेंसियां जब्त तो करती हैं लेकिन अभियोजन पक्ष की शिकायत में उन पर भरोसा नहीं करतीं। अदालत ने कहा कि इन याचिकाओं का उद्देश्य ''मुकदमे को शुरुआत में ही पेचीदगियों की भूलभुलैया में धकेलना'' है।विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने ने कहा कि इन दस्तावेजों को एकमुश्त उपलब्ध कराना न केवल ''उलटी गंगा बहाने'' जैसा होगा, बल्कि यह न्यायिक प्रक्रिया को भी ''पूरी तरह अव्यवस्थित'' कर देगा।
उन्होंने दो अन्य आरोपियों- लालू प्रसाद के निजी सचिव (पीएस) आर के महाजन और रेलवे के पूर्व महाप्रबंधक महीप कपूर की याचिकाएं भी खारिज की दीं। महाजन ने एक 'अनरिलायड' दस्तावेज और कपूर ने ऐसे 23 दस्तावेज उपलब्ध कराए जाने का अनुरोध किया था। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) के अनुसार, यह मामला 2004 से 2009 के बीच लालू प्रसाद के रेल मंत्री रहने के दौरान मध्य प्रदेश के जबलपुर में भारतीय रेल के पश्चिम मध्य जोन में चतुर्थ श्रेणी की नियुक्तियों से जुड़ा है। आरोप है कि भर्ती किए गए लोगों ने इन नियुक्तियों के बदले राष्ट्रीय जनता दल (राजद) प्रमुख के परिवार या सहयोगियों को भूखंड दिए।
लालू प्रसाद, उनकी पत्नी, दो बेटियों और अन्य लोगों के खिलाफ 18 मई 2022 को यह मामला दर्ज किया गया था। न्यायाधीश गोगने ने बुधवार को पारित 35 पृष्ठ के आदेश में कहा कि मुकदमे पर से अदालत का वैधानिक नियंत्रण ''आरोपियों द्वारा जिरह की आड़ में हथियाया'' नहीं जा सकता और ऐसा प्रतीत होता है कि आवेदकों का कार्यवाही को लंबा खींचने का ''गुप्त इरादा'' है। अदालत ने कहा कि निष्पक्ष सुनवाई के अधिकार और कार्यवाही का शीघ्र समापन सुनिश्चित करने के लिए वैधानिक प्रावधानों के अनुरूप साक्ष्यों को दर्ज करना आवश्यक है।
अदालत ने कहा कि आरोपी यह अनुरोध कर रहे हैं कि बचाव की तैयारी शुरू करने से पहले उन्हें सभी या कुछ 'अनरिलायड' दस्तावेज उपलब्ध कराए जाएं यानी जिरह शुरू करने के लिए ऐसे दस्तावेजों की उपलब्धता को एक शर्त के रूप में पेश किया जा रहा है। अदालत ने याचिकाओं को ''अस्वीकार्य'' बताते हुए कहा कि आरोपियों को ''न्यायिक कार्यवाही जारी रखने पर कोई शर्त लगाने की अनुमति नहीं दी जा सकती।'' अदालत ने कहा कि आरोपियों को पहले ही उन दस्तावेजों का निरीक्षण करने का पर्याप्त अवसर दिया गया था, जो साक्ष्यों के उस समूह का हिस्सा हैं, अभियोजन की शिकायत में जिनका इस्तेमाल नहीं किया गया।
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