न्यायिक अधिकारियों पर हमला निदंनीय, भाजपा अशांति फैलाने की 'साजिश' रच रही: ममता

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सुति/सागरदिघी (पश्चिम बंगाल), गुरुवार, 02 अप्रैल 2026। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मालदा में न्यायिक अधिकारियों के घेराव मामले में बृहस्पतिवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और निर्वाचन आयोग को निशाना बनाते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर बंगाल में अशांति फैलाने और अंततः विधानसभा चुनाव से पहले राष्ट्रपति शासन लागू करने के लिए ''साजिश रचने'' का आरोप लगाया। मुर्शिदाबाद जिले के सागरदिघी और सुति में रैलियों को संबोधित करते हुए बनर्जी ने सधे हुए शब्दों में भाजपा पर तीखा हमला किया और लोगों से ''भाजपा के दंगों के जाल'' में नहीं फंसने का आग्रह किया। उन्होंने निर्वाचन आयोग पर न्यायिक अधिकारियों की ''रक्षा करने में विफल रहने'' का आरोप लगाया तथा जोर देकर कहा कि निर्वाचन आयोग के हस्तक्षेप के बाद प्रशासनिक शक्तियां छीन लिए जाने के बावजूद वह राजनीतिक रूप से लड़ाई लड़ रही हैं।

मतदाता सूची से नाम हटाने के विरोध में प्रदर्शनकारियों द्वारा विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में शामिल सात न्यायिक अधिकारियों का घेराव किए जाने का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, ''मेरी सारी शक्तियां छीन ली गई हैं और बंगाल को बदनाम किया जा रहा है। प्रशासन से किसी ने भी मुझे मालदा घटना के बारे में सूचित तक नहीं किया।'' उच्चतम न्यायालय की टिप्पणियों का समर्थन करते हुए बनर्जी ने कहा, ''उच्चतम न्यायालय ने बिल्कुल सही कहा है।''

उच्चतम न्यायालय ने एसआईआर अभियान के दौरान मालदा जिले में सात न्यायिक अधिकारियों का घेराव करने और उन पर हमले की ''खेदजनक'' घटना पर पश्चिम बंगाल प्रशासन की कथित निष्क्रियता की कड़ी निंदा की और सीबीआई या एनआईए (राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण) द्वारा स्वतंत्र जांच का आदेश दिया। इस घटना की निंदा करते हुए बनर्जी ने कहा कि लोगों को विरोध करने का अधिकार है लेकिन ''किसी को भी न्यायाधीशों या न्यायिक अधिकारियों को परेशान नहीं करना चाहिए''। उन्होंने आरोप लगाया कि मालदा प्रकरण का इस्तेमाल ''पूरे बंगाल को बदनाम करने'' के लिए किया जा रहा है।

बनर्जी ने सुति रैली में कहा, ''भाजपा ने कई योजनाएं बनाई हैं और भारत सरकार उसकी सहयोगी की भूमिका निभा रही है। अमित शाह एक साजिश की रूपरेखा तैयार कर रहे हैं। मैं आप सभी से अपील करती हूं - दंगों के जाल में नहीं फंसें। यह भाजपा की साजिश है।'' तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ने बार-बार अपने समर्थकों से उकसावे का जवाब नहीं देने का आग्रह किया और भाजपा को एक ऐसी पार्टी के रूप में चित्रित किया जो बंगाल में चुनावी हार के बाद ध्रुवीकरण तथा तनाव पैदा करने की कोशिश करती है।

उन्होंने कहा, ''वे सोचते हैं कि वे बाहुबल से जीत हासिल कर लेंगे। वे सोचते हैं कि वे बल प्रयोग से जीत छीन लेंगे। मैं सभी से अपील करती हूं – दंगे या हिंसा में शामिल नहीं हों। शांत रहें। भाजपा चाहे जितना भी बंगाल पर हमला करे, बंगाल फिर से विजयी होगा।'' बनर्जी ने कहा कि लोगों को अपने वोट के माध्यम से यह सुनिश्चित करना होगा कि ऐसे प्रयासों के पीछे जो लोग हैं उन्हें दंडित किया जाए। उन्होंने कहा, ''धर्म के नाम पर लोगों को बांटने की कोशिश करने वालों को लोकतांत्रिक तरीके से हराना होगा।''

मुख्यमंत्री की यह टिप्पणी बुधवार को मालदा में हुए नाटकीय घटनाक्रम की पृष्ठभूमि में आई है, जहां एसआईआर प्रक्रिया में शामिल न्यायिक अधिकारियों को आक्रोशित स्थानीय लोगों ने घेर लिया था और आरोप लगाया था कि वास्तविक मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं। उच्चतम न्यायालय ने राज्य प्रशासन की तीखी आलोचना करते हुए कहा कि यह घटना ''राज्य प्रशासन की पूर्ण विफलता को भी उजागर करती है।'' उसने टिप्पणी की कि पश्चिम बंगाल ''सबसे अधिक ध्रुवीकरण वाला राज्य'' है।

न्यायालय ने निर्वाचन आयोग को निर्देश दिया कि वह राज्य में ''पर्याप्त केंद्रीय बलों की मांग करे और उन्हें उन सभी स्थानों पर तैनात करे जहां मतदाता सूचियों की एसआईआर (विशेष गहन पुनरीक्षण) प्रक्रिया के तहत न्यायिक अधिकारी आपत्तियों का निपटारा कर रहे हैं।'' उन्होंने कहा, ''निर्वाचन आयोग को यह भी निर्देश दिया जाता है कि वह कल की घटना की जांच/पड़ताल किसी स्वतंत्र एजेंसी यानी सीबीआई या एनआईए को सौंपे। अनुपालन रिपोर्ट दाखिल की जाए। जिस एजेंसी को जांच सौंपी जाएगी, वह सीधे इस न्यायालय में प्रारंभिक रिपोर्ट दाखिल करने के लिए बाध्य होगी। बनर्जी ने घेराव की निंदा की, लेकिन साथ ही उन्होंने निर्वाचन आयोग पर अधिकारियों की सुरक्षा में नाकाम रहने का आरोप लगाया।

उन्होंने कहा, ''किसी को भी न्यायाधीशों या न्यायिक अधिकारियों को परेशान नहीं करना चाहिए। लोगों को विरोध करने का पूरा अधिकार है, लेकिन किसी को भी उन पर हाथ नहीं उठाना चाहिए।'' सागरदिघी में अपनी पहली रैली में बनर्जी ने कहा कि वह इस बात से स्तब्ध हैं कि निर्वाचन आयोग चुनाव की घोषणा के बाद प्रशासन का नियंत्रण अपने हाथ में लेने के बावजूद अधिकारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में विफल रहा। उन्होंने कहा, ''निर्वाचन आयोग न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा करने में विफल रहा, जिसकी मैं निंदा करती हूं।''

बनर्जी ने दावा किया कि निर्वाचन आयोग ने वरिष्ठ अधिकारियों का तबादला करके और अपने अधिकारियों को महत्वपूर्ण पदों पर तैनात करके राज्य सरकार के अधिकार पहले ही छीन लिए हैं और कहा कि निर्वाचन आयोग अब जिम्मेदारी से बच नहीं सकता। मुख्यमंत्री ने कहा, ''मेरी सारी शक्तियां छीन ली गई हैं, मैंने ऐसा निर्वाचन आयोग पहले कभी नहीं देखा।'' पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव की घोषणा के तुरंत बाद आयोग ने राज्य के मुख्य सचिव, गृह सचिव और पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) सहित कई अधिकारियों को पद से हटा दिया था। मालदा घटना का जिक्र करते हुए बनर्जी ने कहा कि पूरे राज्य को बदनाम करने की कोशिश की जा रही है।

बनर्जी ने आरोप लगाया कि भाजपा की व्यापक रणनीति बंगाल में असाधारण हस्तक्षेप को जायज ठहराने के लिए पर्याप्त अस्थिरता और सांप्रदायिक तनाव पैदा करना है। उन्होंने कहा, ''भाजपा की योजना चुनाव रद्द करवाना और फिर बंगाल में राष्ट्रपति शासन लागू करवाना है।'' बनर्जी ने दावा किया कि मतदाता सूची से नाम हटाना कुछ चुनिंदा इलाकों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि पूरे राज्य में हो रहा है, जिसमें उनका अपना भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र भी शामिल है।  उन्होंने कहा, ''क्या आपको लगता है कि सिर्फ आपके नाम हटाए गए हैं? मेरे भवानीपुर निर्वाचन क्षेत्र में ही 40,000 नाम हटाए जा चुके हैं। वे एक-एक करके नाम हटा रहे हैं। इनमें से अधिकांश अल्पसंख्यक, गरीब महिलाएं और हिंदू माताएं व बहनें हैं।''

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