सीबीआई ने उत्तराखंड के एलयूसीसी चिटफंड घोटाले के दो मास्टरमाइंड को मुंबई से किया गिरफ्तार

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नई दिल्ली, मंगलवार, 02 जून 2026। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने उत्तराखंड के बहुचर्चित लोनी अर्बन मल्टी स्टेट क्रेडिट एंड थ्रिफ्ट को-ऑपरेटिव सोसाइटी (एलयूसीसी) चिटफंड घोटाले में बड़ी कार्रवाई करते हुए दो प्रमुख आरोपियों को महाराष्ट्र के मुंबई से गिरफ्तार किया है। सीबीआई ने मंगलवार को बताया कि दोनों आरोपियों को सोमवार को गिरफ्तार किया गया था। यह कार्रवाई विस्तृत वित्तीय दस्तावेजों के विश्लेषण, बैंक लेन-देन की जांच, मौखिक साक्ष्य जुटाने तथा देश के विभिन्न राज्यों में व्यापक जांच-पड़ताल के बाद की गई है।

उल्लेखनीय है कि उत्तराखंड उच्च न्यायालय के निर्देश पर सीबीआई ने 26 नवंबर 2025 को इस मामले की जांच अपने हाथ में ली थी। इससे पहले उत्तराखंड पुलिस ने एलयूसीसी और उसके पदाधिकारियों के खिलाफ 18 प्राथमिकी दर्ज की थीं। मामला जनता से अवैध रूप से धन जमा कराने, धोखाधड़ी, आपराधिक षड्यंत्र, धन के दुरुपयोग तथा अनियमित जमा योजनाओं के संचालन से संबंधित है। जांच में अब तक सामने आया है कि उत्तराखंड में एक लाख से अधिक निवेशकों को विभिन्न अनियमित निवेश योजनाओं में धन लगाने के लिए प्रलोभन दिया गया था। निवेशकों से जुटाई गई कुल राशि लगभग 800 करोड़ रुपये आंकी गई है।

सीबीआई के अनुसार, गिरफ्तार किए गए दोनों आरोपी मुख्य साजिशकर्ताओं में शामिल हैं और उन्होंने अन्य आरोपियों के साथ मिलकर निवेशकों से एकत्र धन के संग्रहण, प्रबंधन, हस्तांतरण और कथित गबन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। जांच एजेंसी को ऐसे साक्ष्य भी मिले हैं जो लाखों निवेशकों से जुटाई गई धनराशि के उपयोग और उसके प्रवाह से जुड़े व्यापक षड्यंत्र की ओर संकेत करते हैं।

सीबीआई ने बताया कि दोनों आरोपियों को ट्रांजिट रिमांड पर देहरादून ले जाया जाएगा और बड्स अधिनियम के तहत गठित विशेष न्यायालय में पेश किया जाएगा। इससे पहले सीबीआई ने 12 और 13 मई को पांच अन्य आरोपियों को गिरफ्तार किया था, जिनमें एलयूसीसी के तीन वरिष्ठ सहकारी प्रमोटर भी शामिल थे। सभी आरोपी वर्तमान में देहरादून की सुद्धोवाला जेल में न्यायिक हिरासत में हैं। जांच एजेंसी ने आरोपियों द्वारा कथित रूप से अपराध से अर्जित धन से खरीदी गई कई अचल संपत्तियों का भी पता लगाया है। इन संपत्तियों का विवरण उत्तराखंड सरकार के वित्त सचिव को भेजा गया है और उन्हें फ्रीज करने तथा बड्स अधिनियम के तहत पीड़ित निवेशकों के हित में आवश्यक कार्रवाई करने का अनुरोध किया गया है। सीबीआई ने कहा है कि मामले की जांच जारी है और इसे शीघ्र पूरा करने का प्रयास किया जा रहा है।

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