शिवसेना टूट के बावजूद मजबूत है, आदित्य में नेतृत्व करने की काबिलियत है: संजय राउत
मुंबई, शुक्रवार, 26 जून 2026। शिवसेना (उबाठा) के सांसद संजय राउत ने शुक्रवार को कहा कि पार्टी टूट के बावजूद मज़बूत बनी हुई है और आदित्य ठाकरे में पार्टी का नेतृत्व करने की काबिलियत है। हाल ही में एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल हुए पार्टी के छह सांसदों के लोकसभा क्षेत्रों में शिवसेना (उबाठा) प्रमुख उद्धव ठाकरे के प्रस्तावित दौरे से पहले 'पीटीआई वीडियो' से बातचीत में राउत ने आरोप लगाया कि इन नेताओं ने केवल पैसे, सत्ता और संरक्षण के लालच में अपनी निष्ठा बदली है।
शिवसेना (उबाठा) के विधायक आदित्य ठाकरे की पार्टी में भूमिका के बारे में पूछे जाने पर राउत ने कहा, ''अगली पीढ़ी को धीरे-धीरे ज़्यादा जिम्मेदारी लेनी चाहिए। हम कितने सालों तक काम करते रहेंगे? हम 40 सालों से काम कर रहे हैं। युवा नेताओं को पार्टी की कमान संभालनी चाहिए और वह ऐसा कर भी रहे हैं। वह (आदित्य) आधिकारिक तौर पर भी ऐसा करेंगे, उनमें काबिलियत है और हम उनका स्वागत करेंगे।''
राउत ने कहा कि उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली पार्टी छोड़ने वाले नेता असल मायने में ''बागी'' नहीं थे। उन्होंने तर्क दिया कि यह शब्द भगत सिंह और सुखदेव जैसे स्वतंत्रता सेनानियों के लिए ही इस्तेमाल किया जाना चाहिए, न कि उन नेताओं के लिए जो पैसे और सत्ता के लिए पाला बदलते हैं। राउत ने कहा कि उद्धव ठाकरे का दौरा उन सांसदों के निर्वाचन क्षेत्रों में मतदाताओं और कार्यकर्ताओं को पार्टी का रुख सीधे तौर पर समझाने के लिए किए गए संपर्क अभियान का हिस्सा है, जिन्होंने पार्टी छोड़ी थी। उन्होंने कहा कि सांसद ''करोड़ों रुपयों के लिए बिक गए'', और दावा किया कि शिवसेना का कैडर उद्धव ठाकरे के साथ ही है।
जब उनसे पूछा गया कि क्या इन छह सांसदों की भाव भंगिमा से उनके आत्मविश्वास का पता चलता है, तो राउत ने उन्हें जनता का सामना करने की चुनौती दी। उन्होंने कहा, ''हमारे दौरे के बाद देखेंगे कि उनका आत्मविश्वास कितना कायम रहता है।... जब विश्वासघात के बाद आपको 'जेड प्लस' श्रेणी की सुरक्षा मिल जाती है, तो आत्मविश्वास बढ़ ही जाता है।'' यह पूछे जाने पर कि शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) छोड़ने वाले नेता अपने फैसले के लिए हमेशा उन्हें ही क्यों जिम्मेदार ठहराते हैं, राउत ने कहा, ''क्योंकि मैं पार्टी और बालासाहेब ठाकरे की विचारधारा के प्रति वफादार हूं। उन्होंने कई बार मुझे भी तोड़ने की कोशिश की। मैंने एकनाथ शिंदे की बगावत समेत पहले हुए दल-बदल को रोकने का प्रयास किया था। मैंने उन्हें चेताया था कि सत्ता अस्थायी होती है और उन्हें बालासाहेब की पार्टी को तोड़ने जैसा पाप नहीं करना चाहिए।''
राउत ने कहा कि राजनीतिक दलों में होने वाली टूट-फूट के पीछे पैसे का लालच और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) तथा केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) जैसी जांच एजेंसियों का डर प्रमुख कारण होता है। उन्होंने कहा, ''बस हमें एक घंटे के लिए ईडी और सीबीआई दे दीजिए, फिर हम उन्हें दिखा देंगे।''
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