राजकोषीय संकट से बचने के लिए केरल में आर्थिक ढांचे में तत्काल सुधार जरूरी : सतीशन

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तिरुवनंतपुरम, मंगलवार, 30 जून 2026। केरल के मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन ने चेतावनी दी है कि यदि राज्य में बुनियादी आर्थिक सुधार नहीं किये गये तो केरल गंभीर राजकोषीय संकट की ओर बढ़ सकता है। उन्होंने कहा कि मौजूदा आर्थिक मॉडल रोजगार सृजन, कल्याणकारी योजनाओं और दीर्घकालिक विकास की आवश्यकताओं को पूरा करने में सक्षम नहीं है। उन्होंने कहा कि राज्य के कुल राजस्व का 77 प्रतिशत हिस्सा पहले से निर्धारित व्ययों में खर्च हो जाता है, जिससे विकास कार्यों के लिए बहुत कम वित्तीय गुंजाइश बचती है। वहीं पूंजीगत व्यय घटकर मात्र 1.3 प्रतिशत रह गया है, जो देश में सबसे कम स्तरों में से एक है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि तत्काल सुधारात्मक कदम नहीं उठाये गये तो सरकार की स्थिति ऐसी हो सकती है कि उसके पास केवल ऋण और ब्याज का भुगतान करने भर के संसाधन बचेंगे, जिससे रोजगार सृजन और कल्याणकारी योजनाओं को जारी रखना कठिन हो जायेगा। 

सतीशन ने कहा कि राज्य में तेजी से बढ़ती वृद्ध आबादी के कारण कल्याणकारी दायित्व बढ़ रहे हैं और इससे सरकारी वित्त पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि बढ़ता कर्ज, सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) के अनुपात में ऋण का बढ़ना तथा वित्तीय लचीलेपन में कमी को देखते हुए संरचनात्मक सुधार अपरिहार्य हो गए हैं। उन्होंने कहा कि अभी सुधार का समय है, लेकिन और देरी महंगी साबित हो सकती है। उन्होंने विधानसभा में बजट मांगों पर चर्चा में भाग लेते हुए सोमवार को कहा कि राज्य की बिगड़ती वित्तीय स्थिति से निपटने के लिए पारंपरिक उपायों के बजाय साहसिक नीतिगत बदलावों की आवश्यकता है।

उन्होंने स्वीकार किया कि मौजूदा बजट पारंपरिक पद्धतियों से अलग है और कहा कि केरल की वित्तीय स्थिति अब अत्यंत गंभीर स्तर पर पहुंच चुकी है। उन्होंने 1930 की महामंदी का उल्लेख करते हुए कहा कि आर्थिक संकटों से उबरने के लिए नये दृष्टिकोण अपनाने पड़ते हैं। कीन्स के आर्थिक सिद्धांतों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि आर्थिक गतिविधियों को गति देने के लिए बाजार में पर्याप्त धन का प्रवाह आवश्यक है, लेकिन सरकारों के पास अब सीमित वित्तीय संसाधन हैं, इसलिए निवेश आधारित विकास ही आगे का रास्ता है।

उन्होंने कहा कि केरल को प्रवासी भारतीयों से मिलने वाली धनराशि पर आधारित अर्थव्यवस्था से निवेश आधारित अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ना होगा। उन्होंने चेतावनी दी कि प्रवासी आय पर अत्यधिक निर्भरता अब सुरक्षित नहीं है। यदि खाड़ी देशों से बड़ी संख्या में मलयाली वापस लौटते हैं तो उनके लिए राज्य में निवेश और रोजगार के नये अवसर पैदा करने होंगे। उन्होंने रिवर्स रेमिटेंस पर भी चिंता जताते हुए कहा कि दूसरे राज्यों से आये प्रवासी श्रमिक अपनी आय का बड़ा हिस्सा अपने गृह राज्यों में भेजते हैं, जिससे राज्य में धन का प्रवाह कम होता है। उन्होंने कहा कि प्रवासी श्रमिक राज्य की अर्थव्यवस्था के लिए आवश्यक हैं, लेकिन रिवर्स रेमिटेंस के दीर्घकालिक आर्थिक प्रभावों का विस्तृत अध्ययन कराया जाना चाहिये।

सतीशन ने कहा कि केरल की 600 किलोमीटर लंबी तटरेखा राज्य की महत्वपूर्ण आर्थिक संपत्ति है। बंदरगाहों, लॉजिस्टिक्स, विमानन अवसंरचना तथा सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) का तेजी से विकास कर निवेश आकर्षित किया जा सकता है और रोजगार के अवसर बढ़ाये जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि इसके लिए भूमि संबंधी अनुकूल नीतियां, त्वरित मंजूरी और निवेशकों के लिए अनुकूल वातावरण आवश्यक है। उन्होंने कराधान के संबंध में कहा कि राजस्व बढ़ाने के लिए ईमानदार करदाताओं पर अतिरिक्त बोझ डालने के बजाय कर प्रशासन को अधिक प्रभावी बनाया जाना चाहिए। उन्होंने कर ढांचे के व्यापक पुनर्गठन, कर चोरी पर सख्ती और ईमानदार करदाताओं के संरक्षण की वकालत की।

उन्होंने इस आरोप को भी खारिज किया कि लाइफ मिशन आवास योजना को बंद किया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और तटीय समुदायों के लिए अलग आवास योजनाओं का प्रस्ताव मौजूदा व्यवस्था की कमियों को दूर करने के लिए है, न कि प्रमुख योजना को समाप्त करने के लिए। प्रस्तावित खनिज गलियारे को लेकर लगाये गये निजीकरण के आरोपों का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि ये दावे भ्रामक हैं। उन्होंने कहा कि पिछली सरकार ने स्वयं केरल मिनरल्स एंड मेटल्स लिमिटेड (केएमएमएल) के माध्यम से वैश्विक निविदाएं आमंत्रित कर निजी भागीदारी की प्रक्रिया शुरू की थी। उन्होंने कहा कि केरल के हित सर्वोपरि हैं और नीतिगत त्रुटियों को बिना किसी हिचकिचाहट के सुधारा जाना चाहिए। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यदि बजट की विभिन्न पहलों को प्रभावी ढंग से लागू किया जाए तो अगले तीन महीनों में उनके सकारात्मक परिणाम दिखाई देने लगेंगे। साथ ही उन्होंने राज्य के आर्थिक भविष्य को सुरक्षित करने के लिए सभी राजनीतिक दलों से रचनात्मक सहयोग की अपील की।

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