निर्वाचन आयोग एसआईआर प्रक्रिया को लेकर हमारे सवालों का जवाब दे : प्रियंक खरगे

img

बेंगलुरु, मंगलवार, 30 जून 2026। कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियंक खरगे ने मंगलवार को एक बार फिर निर्वाचन आयोग से मांग की कि वह मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया को लेकर कांग्रेस द्वारा उठाए गए सवालों का जवाब दे। इस बीच, मंगलवार को कर्नाटक में एसआईआर की प्रक्रिया शुरू हुई और स्वयं मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने अपना गणना प्रपत्र भरा। खरगे ने एसआईआर प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि निर्वाचन आयोग को इन सवालों का जवाब देना चाहिए, क्योंकि लोग इस मुद्दे पर अपनी उलझनें दूर करने के लिए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के मुख्यालय नहीं जा सकते।

उन्होंने हालांकि स्पष्ट किया कि कांग्रेस कभी भी एसआईआर के खिलाफ नहीं थी, बल्कि वह चाहती है कि मतदाता सूची त्रुटिरहित और सटीक तरीके से तैयार की जाए तथा यह कार्य निर्वाचन आयोग ही कर सकता है। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के पुत्र प्रियंक ने यहां संवाददाताओं से कहा, ''हमारा कहना है कि जो भी योग्य हैं, उन सभी को शामिल किया जाए। पश्चिम बंगाल, बिहार, तमिलनाडु और केरल में नागरिकों के बीच काफी भ्रम पैदा हो गया है। क्या यह कहना गलत है कि यहां ऐसा भ्रम नहीं होना चाहिए?'' मंत्री ने दावा किया कि कांग्रेस ने निर्वाचन आयोग से 12 सवाल पूछे थे, लेकिन आयोग ने उनका जवाब देना मुनासिब नहीं समझा।

उन्होंने कहा, ''निर्वाचन आयोग बताए कि हमारे 12 सवालों में से कौन-सा सवाल बेतुका, असंवैधानिक या गैर-कानूनी है। हम तैयार हैं। क्या केवल उसे ही कानून की जानकारी है? क्या केवल वह ही संविधान का ज्ञाता है? अगर हमें कोई शक है, तो क्या हमें निर्वाचन आयोग से नहीं पूछना चाहिए? हमें क्या करना चाहिए-क्या हम अपने पत्र भाजपा कार्यालय में जमा करें? हमने उस प्राधिकार से संपर्क किया है जो इसके लिए जिम्मेदार है। अब जवाब देना उसी का काम है।''

प्रियंक ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा, ''अगर आप निर्वाचन आयोग से कोई सवाल पूछते हैं, तो भाजपा जवाब देती है। अगर आप आरएसएस (राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ)से कोई सवाल पूछते हैं, तो भाजपा जवाब देती है। अपनी पार्टी से जुड़े मामलों को छोड़कर, वह बाकी हर चीज़ का जवाब देती है। क्या यह अजीब नहीं है?'' उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र की भाजपा सरकार ने निर्वाचन आयोग को अपनी 'कठपुतली' बना लिया है। मंत्री ने आरोप लगाया, ''केंद्र सरकार ने निर्वाचन आयोग को अपना कठपुतली बनाने की कोशिश की है। असल में, वे ऐसा कर भी चुके हैं।''

उन्होंने कहा कि प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई), मुख्य चुनाव आयुक्त को चुनने वाली समिति का हिस्सा थे, लेकिन उन्हें हटाकर उनके स्थान पर एक कैबिनेट मंत्री को शामिल किया गया है। इसका अभिप्राय है कि चाहे किसी को भी चुना जाए, तीन सदस्यों वाली इस समिति को असल में प्रधानमंत्री की इच्छा के अनुसार ही काम करना होगा।

प्रियंक ने कहा कि 80 सांसदों को निलंबित करने के बाद,भाजपा ने एक कानून के जरिए मुख्य चुनाव आयुक्त को न्यायिक समीक्षा से छूट दी, जिसका अभिप्राय है कि अपने कर्तव्यों का पालन करते हुए वह जो कुछ भी करते हैं, उस पर किसी भी कानून के तहत या किसी भी अदालत में सवाल नहीं उठाया जा सकता। उन्होंने कहा कि न्यायिक समीक्षा से छूट मिलने के बाद, निर्वाचन आयोग ने एसआईआर शुरू की। प्रियंक ने कहा, ''उन्होंने केरल, बिहार और तमिलनाडु में प्रयोग (एसआईआर) किए, जिनमें कई कमियां सामने आईं। पश्चिम बंगाल में, उन्होंने 'तार्किक विसंगति का विचार पेश किया। तार्किक विसंगति के बहाने, कई लोगों के नाम मतदाता सूची से हटा दिया गया।''

उन्होंने कहा कि एक न्यायाधिकरण का गठन किया गया, जिसके प्रमुख उच्चतम न्यायालय के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश थे। न्यायाधिकरण के सामने लगभग 27 लाख याचिकाएं दायर की गईं। बाद में उक्त सेवानिवृत्त न्यायाधीश ने यह कहते हुए इस्तीफा दे दिया कि काम पूरा नहीं हो सकता और इसमें चार साल लगेंगे। प्रियंक ने कहा, '' इसके बाद अदालत ने कहा कि वे लोग इस बार मतदान नहीं कर पाएंगे और इस मामले पर अगली बार विचार किया जाएगा। इस घटनाक्रम को समझिए। यह सब क्यों किया जा रहा है? आपके अधिकार छीनने के लिए।''

मंत्री ने आरोप लगाया कि असम में परिसीमन किया गया और जनसांख्यिकीय संतुलन बदल दिया गया। उन्होंने कहा कि भाजपा महिला आरक्षण विधेयक लेकर आई थी और अब वे परिसीमन आयोग पर अपना नियंत्रण बनाए रखना चाहते हैं। प्रियंक ने आरोप लगाया, ''आज वे दो-तिहाई बहुमत के लिए इतने बेताब क्यों हैं? वे तृणमूल कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी को निशाना क्यों बना रहे हैं? क्योंकि दो-तिहाई बहुमत मिलने पर वे एक बार फिर वह विधेयक पेश कर सकते हैं और परिसीमन आयोग पर अपना नियंत्रण कर सकते हैं।'' उन्होंने कहा कि कांग्रेस इन हथकंडों के खिलाफ लड़ रही है।

Similar Post

LIFESTYLE

AUTOMOBILES

Recent Articles

Facebook Like

Subscribe

FLICKER IMAGES

Advertisement