जन्म एवं मृत्यु रजिस्ट्रीकरण (संशोधन) विधेयक लोकसभा में बिना चर्चा के पारित

img

नई दिल्ली, शुक्रवार, 31 जुलाई 2026। लोकसभा में शुक्रवार को विपक्षी सदस्यों के हंगामे के बीच जन्म एवं मृत्यु रजिस्ट्रीकरण (संशोधन) विधेयक 2026 बिना चर्चा के पारित किया गया। इस विधेयक में देरी से जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण के लिए नियम कड़े किये गये हैं। एक साल से अधिक की देरी से लेकिन दो साल के भीतर जन्म या मृत्यु पंजीकरण के लिए जिला मजिस्ट्रेट या उपमंडलीय मजिस्ट्रेट या फिर जिला मजिस्ट्रेट द्वारा नियुक्त कार्यकारी मजिस्ट्रेट का आदेश अनिवार्य था जो सत्यापन के बाद यह आदेश देने के लिए प्राधिकृत है। वहीं, दो साल से अधिक की देरी की स्थिति में प्रथम श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश पर ही जन्म या मृत्यु पंजीकरण होगा।

वर्तमान में एक साल बाद किसी भी समय तक संबंधित क्षेत्र के जिला मजिस्ट्रेट या उपमंडलीय मजिस्ट्रेट या जिला मजिस्ट्रेट द्वारा नियुक्त कार्यकारी मजिस्ट्रेट का आदेश ही पर्याप्त था और दो साल से ऊपर के लिए अलग से कोई प्रावधान नहीं था। एक बार के स्थगन के बाद दोपहर 12 बजे कार्यवाही जब पुन: शुरू हुई तो विपक्षी सदस्य 20 जुलाई को संसद भवन के निकट प्रदर्शन कर रहे विद्यार्थियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई की जवाबदेही निर्धारित करने और इसके लिए आदेश देने वाले का नाम सदन में बताने की मांग करते हुए फिर हंगामा करने लगे। समाजवादी पार्टी के सदस्य अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के मामले पर शोरगुल कर रहे थे।

पीठासीन अधिकारी दिलीप सैकिया ने इसी बीच विधायी दस्तावेज पटल पर रखवाये। उन्होंने हंगामा कर रहे सदस्यों से शाेरगुल न करने और सदन की कार्यवाही सुचारू रूप से चलाने में सहयोग करने की अपील की, लेकिन शोरगुल जारी रहा। इसी दौरान श्री सैकिया ने गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय से जन्म एवं मृत्यु रजिस्ट्रीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026 पेश करने को कहा। विधेयक पेश किये जाने के बाद पीठासीन अधिकारी ने इस पर चर्चा के लिए नाम और संशोधन के नोटिस देने वाले सदस्यों को पुकारा। इन सदस्यों में से किसी के विधेयक पर पर अपनी बात न कहने पर उन्होंने विधेयक पर खंडवार विचार करने का एलान किया।

इसके बाद श्री सैकिया ने श्री राय को विधेयक पारित करने का प्रस्ताव करने की अनुमति दी। विपक्षी सदस्यों के शोरगुल के बीच ही विधेयक को ध्वनिमत से पारित कर दिया गया। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने इस पर कहा कि विपक्षी सदस्यों ने इतने महत्वपूर्ण विधेयक पर चर्चा में भाग नहीं लिया और वे सदन के बाहर जाकर कहेंगे कि बिना चर्चा के विधेयक पारित कराये जा रहे हैं। विपक्षी सदस्यों का यह रवैया दुर्भाग्यपूर्ण है। इस बारे में कार्य मंत्रणा समिति की बैठक में भी चर्चा की गयी थी लेकिन विपक्षी सदस्य सहयोग नहीं कर रहे हैं। सरकार आगे भी विधेयक लायेगी और विपक्षी सदस्य तब भी हंगामा करेंगे, यह अच्छा नहीं होगा। जनता इसके लिए उनसे जवाब मांगेगी।

इसके बाद श्री सैकिया ने विपक्षी सदस्यों से कहा कि उनके सहयोग के बिना ही विधेयक पारित करना पड़ा। यह परम्परा ठीक नहीं है। वे अपने-अपने स्थानों पर जायें और कार्यवाही चलाने में सहयोग करें। हंगामा कर रहे सदस्यों पर उनकी अपील का कोई असर नहीं हुआ तो उन्होंने सदन की कार्यवाही सोमवार पूर्वाह्न 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी।

Similar Post

LIFESTYLE

AUTOMOBILES

Recent Articles

Facebook Like

Subscribe

FLICKER IMAGES

Advertisement