कोयंबटूर में 2022 के बम विस्फोट मामले में ईडी की तमिलनाडु, मुंबई और हैदराबाद में छापेमारी

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चेन्नई, शनिवार, 01 अगस्त 2026। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 2022 के कोयंबटूर बम विस्फोट मामले से जुड़े धनशोधन और आतंकवाद के वित्तपोषण की जांच के सिलसिले में तमिलनाडु, मुंबई और हैदराबाद में 15 स्थानों पर छापेमारी की है। ईडी की चेन्नई क्षेत्रीय इकाई ने धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 की धारा 17(1) के तहत चेन्नई, कोयंबटूर, मुंबई और हैदराबाद स्थित 15 आवासीय परिसरों में तलाशी अभियान चलाया है। ईडी ने राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) द्वारा दर्ज विभिन्न प्राथमिकी के आधार पर जांच शुरू की थी। यह मामला 23 अक्टूबर 2022 को दीपावली की पूर्व संध्या पर कोयंबटूर स्थित प्राचीन अरुलमिगु कोट्टई संगमेश्वरर तिरुकोविल मंदिर के निकट हुए आत्मघाती आईईडी विस्फोट से संबंधित है। 

ईडी ने अपनी वेबसाइट पर जारी विज्ञप्ति में कहा कि यह विस्फोट आत्मघाती हमलावर जमीशा मुबीन ने किया था, जिसने हमले से पहले आतंकवादी संगठन इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक एंड सीरिया (आईएसआईएस) के प्रति निष्ठा की शपथ ली थी। जांच में पाया गया कि मुबीन और उसके सहयोगियों ने मोहम्मद अजरुद्दीन की गिरफ्तारी का बदला लेने के उद्देश्य से यह हमला किया था। अजरुद्दीन पर कट्टरपंथी विचारधारा का प्रचार करने, आईएसआईएस के समर्थन में धार्मिक कक्षाएं संचालित करने तथा युवाओं को संगठन के उद्देश्यों को आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित करने का आरोप है। 

ईडी के अनुसार, मामले के 12 आरोपियों, जिनमें जमीशा मुबीन और मोहम्मद अजरुद्दीन भी शामिल हैं, ने जमील बाशा से शिक्षा प्राप्त की थी। बाशा मद्रास अरबी कॉलेज (कोवई अरबी कॉलेज) का संचालक है। जांच में आरोप है कि वह अरबी शिक्षा की आड़ में खिलाफत की विचारधारा, जिहाद और हिंसक संघर्ष का प्रचार कर भारत में इस्लामी शासन स्थापित करने की वकालत करता था। जांच में यह भी सामने आया कि अगस्त 2021 से जून 2022 के बीच आरोपियों ने फर्जी कोविड-19 टीकाकरण प्रमाणपत्र तैयार कर बेचने का गिरोह चलाया। तमिलनाडु और मुंबई के विभिन्न क्षेत्रों में बिना टीका लगवाए प्रमाणपत्र चाहने वाले लोगों से धन लेकर उन्हें फर्जी प्रमाणपत्र उपलब्ध कराए जाते थे।

ईडी के अनुसार, इस अवैध गतिविधि से अर्जित धन का इस्तेमाल विस्फोटक सामग्री खरीदने तथा मद्रास अरबी कॉलेज/कोवई अरबी कॉलेज की गतिविधियों के संचालन में किया गया था। जांच में यह भी पाया गया कि जमील बाशा ने अपने पूर्व छात्रों, निवेशकों और अन्य लोगों से दान एवं निवेश के माध्यम से धन जुटाया, जिसका उपयोग अरबी शिक्षा की आड़ में ऑनलाइन और ऑफलाइन माध्यम से युवाओं को कट्टरपंथी विचारधारा से प्रभावित करने के लिए किया जाता था। जांच एजेंसी के अनुसार, कॉलेज के माध्यम से अर्जित धन का उपयोग अरबी कक्षाओं के संचालन, विदेश यात्राओं, निजी खर्चों तथा अचल संपत्तियों में निवेश के लिए भी किया गया।

ईडी ने कहा कि गुरुवार को की गई तलाशी के दौरान मोबाइल फोन और लैपटॉप सहित कई डिजिटल उपकरण जब्त किए गए। इसके अलावा आरोपियों के मौद्रिक लेन-देन और अचल संपत्तियों में निवेश से संबंधित कई आपत्तिजनक दस्तावेज भी बरामद किए गए हैं। ईडी ने कहा कि इस मामले की जांच जारी है।

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