ममता बनर्जी की मेडिकल रिपोर्ट सार्वजनिक करने के मामले में 3 डॉक्टरों को भेजा गया नोटिस

img

कोलकाता, सोमवार, 05 अक्टूबर 2026। पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के वकील अर्का कुमार नाग ने सोमवार को दक्षिण कोलकाता के सरकारी एसएसकेएम मेडिकल कॉलेज और अस्पताल तथा सरकारी बांगुर इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूरोसाइंसेस से जुड़े तीन बड़े डॉक्टरों को कानूनी नोटिस भेजा। यह नोटिस पूर्व मुख्यमंत्री की एक मेडिकल रिपोर्ट को सार्वजनिक करने के मामले में भेजा गया, जिससे मरीज और डॉक्टर के बीच गोपनीयता बनाए रखने के नियम का उल्लंघन हुआ।

यह नोटिस एस.एस.के.एम. के डायरेक्टर डॉ. मणिमय बंद्योपाध्याय, बांगुर इंस्टीट्यूट के मेडिकल सुपरिटेंडेंट और वाइस-प्रिंसिपल डॉ. पीयूष कुमार रॉय और बांगुर इंस्टीट्यूट में न्यूरोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. अतानु बिस्वास को भेजा गया है। आईएएनएस के पास मौजूद नोटिस की कॉपी में ममता बनर्जी के वकील ने कहा है कि सार्वजनिक की गई रिपोर्ट के आधार पर मेडिकल मामलों की अधूरी और पक्षपाती जानकारी छापी गई है। ईमेल से भेजे गए दो पेज के नोटिस में नाग ने यह सवाल भी उठाया कि क्या रिपोर्ट को सार्वजनिक करने से पहले ममता बनर्जी की इजाजत ली गई थी, क्योंकि ऐसा करना मरीज और डॉक्टर के बीच गोपनीयता बनाए रखने के नियम का उल्लंघन है।

नोटिस में नाग ने दावा किया कि अगर उनके क्लाइंट की इजाजत के बिना या कानूनी प्रक्रिया का पालन किए बिना यह जानकारी लीक की गई है, तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जानी चाहिए। यह कानूनी नोटिस पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर शनिवार को लगाए गए एक गंभीर आरोप के बीच भेजा गया। यह आरोप सुवेंदु अधिकारी ने लगाया था, जिसमें उन्होंने ममता बनर्जी पर 2021 के विधानसभा चुनावों के दौरान पूर्वी मिदनापुर जिले की नंदीग्राम विधानसभा सीट पर चुनाव प्रचार के समय पैर में फ्रैक्चर होने का झूठा दावा करने का आरोप लगाया था।

शनिवार को मीडिया से बात करते हुए मुख्यमंत्री अधिकारी ने बांगुर इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूरोसाइंसेज की 11 मार्च, 2021 की एक रेडियोडायग्नोसिस रिपोर्ट का जिक्र किया। इस रिपोर्ट में कहा गया था कि उस समय पूर्व मुख्यमंत्री के अंग में फ्रैक्चर का कोई निशान नहीं था। उन्होंने यह भी कहा कि इस मामले की अलग से जांच भी शुरू की जाएगी। यह जांच पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों के लिए मंगलवार को होने वाले उपचुनावों के नतीजे 9 अक्टूबर को घोषित होने के बाद शुरू होगी।

हालांकि, उत्तरी कोलकाता की बेलेघाटा विधानसभा सीट से तृणमूल कांग्रेस के विधायक कुणाल घोष ने इस रिपोर्ट की सच्चाई पर सवाल उठाए। उन्होंने इशारों-इशारों में कहा कि रेडियोडायग्नोसिस रिपोर्ट के साथ छेड़छाड़ की गई हो सकती है। कुणाल घोष ने कहा कि चूंकि पश्चिम बंगाल में अभी भारतीय जनता पार्टी की सरकार है, इसलिए रिपोर्ट की सच्चाई को लेकर सवाल उठना लाजिमी है।  घोष ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट भी किया, जिसमें दावा किया गया कि किसी की निजी मेडिकल जानकारी को सार्वजनिक करना डॉक्टरों या संस्थानों का चलन नहीं है। कुणाल घोष के पोस्ट के दो दिन बाद सोमवार को ममता बनर्जी के वकील ने पूर्व मुख्यमंत्री के कथित मेडिकल रिकॉर्ड को सार्वजनिक करने के मामले में तीन डॉक्टरों को कानूनी नोटिस भेजा।

कानूनी नोटिस में तीनों डॉक्टरों से पूछा गया है कि क्या पूर्व मुख्यमंत्री के कोई मेडिकल दस्तावेज मौजूदा मुख्यमंत्री को दिए गए थे और अगर 'हां', तो क्या संबंधित अधिकारियों ने ऐसा करने से पहले सही कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया था। ममता बनर्जी के वकील ने कहा कि अगर यह पूरा मामला कानूनी प्रक्रिया का पालन किए बिना किया गया, तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। नोटिस में उन्होंने डॉक्टरों से यह भी सुनिश्चित करने को कहा कि ममता बनर्जी की "मेडिकल गोपनीयता" का उल्लंघन न हो और भविष्य में "गुमराह करने वाली जानकारी" न फैलाई जाए।

Similar Post

LIFESTYLE

AUTOMOBILES

Recent Articles

Facebook Like

Subscribe

FLICKER IMAGES

Advertisement