न्यायपालिका पर दबाव डालने का प्रयास था विपक्ष का मार्च: जद(यू)

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नई दिल्ली, गुरुवार, 16 अक्टूबर 2026। जनता दल (यूनाइटेड) ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के हाल में उच्चतम न्यायालय तक निकाले गए विरोध मार्च की शुक्रवार को आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि यह न्यायपालिका पर दबाव डालने का अभूतपूर्व प्रयास था। पार्टी का यह बयान ऐसे वक्त आया है जब एक दिन पहले उच्चतम न्यायालय ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में कथित अनियमितताओं को लेकर गांधी और कई विपक्षी नेताओं द्वारा 12 अक्टूबर को शीर्ष अदालत में याचिका दायर करने के लिए निकाले गए मार्च से जुड़ी एक अर्जी पर सुनवाई के दौरान कहा कि कोई भी न्यायपालिका को डरा-धमका नहीं सकता।

जद(यू) के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा कि ये घटनाक्रम देश के संसदीय इतिहास में अभूतपूर्व हैं। उन्होंने कहा, ‘‘जो कुछ हुआ, वह निस्संदेह भारतीय संसदीय इतिहास में अभूतपूर्व घटना थी। देश ने पहले कभी ऐसे हालात नहीं देखे थे। यह न्यायपालिका पर दबाव डालने की कोशिश थी।’’ प्रसाद ने कहा कि गांधी ने उच्चतम न्यायालय के सामने जिन मुद्दों को लेकर विरोध प्रदर्शन किया, उनमें से अधिकतर पहले से ही अदालत में विचाराधीन हैं। उन्होंने कहा, ‘‘कुछ मुद्दों के संबंध में उच्चतम न्यायालय ने कहा था कि (विपक्षी नेताओं के साथ) बैठक करना संवैधानिक मर्यादा के अनुरूप नहीं होगा। हालांकि, उसने कहा था कि न्यायिक प्रक्रिया का पालन करते हुए और याचिका दायर करके उच्चतम न्यायालय का रुख किया जा सकता है।’’

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने उच्चतम न्यायालय तक मार्च निकालने के खिलाफ दायर याचिका पर बृहस्पतिवार को राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव, तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा, कांग्रेस, केरल प्रदेश कांग्रेस कमेटी और अन्य को नोटिस जारी किए। उच्चतम न्यायालय ने निर्वाचन आयोग और मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को राहुल गांधी तथा 12 अन्य विपक्षी नेताओं की उस याचिका पर जवाब देने का भी निर्देश दिया, जिसमें बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम हटाए जाने और एसआईआर प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं का आरोप लगाया गया है।

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