वंदे मातरम् को लेकर पीआईएल: याचिका उच्च न्यायालय से स्थानांतरित करने की अर्जी पर केंद्र को नोटिस

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नई दिल्ली, मंगलवार, 27 अक्टूबर 2026। उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को केंद्र सरकार से उस याचिका पर जवाब मांगा है जिसमें वंदे मातरम् को राष्ट्रगान के समान दर्जा देने का अनुरोध करने वाली जनहित याचिका (पीआईएल) को दिल्ली उच्च न्यायालय से शीर्ष अदालत में स्थानांतरित करने का अनुरोध किया गया है। प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय की याचिका पर केंद्र को नोटिस जारी किया और इस मामले को ऐसी ही अन्य याचिकाओं के साथ संलग्न कर दिया।

अधिवक्ता अश्विनी दुबे के माध्यम से दाखिल इस याचिका में अनुरोध किया गया है कि चूंकि इसी तरह की एक रिट याचिका पहले से ही शीर्ष अदालत में लंबित है, इसलिए दिल्ली उच्च न्यायालय में लंबित इस जनहित याचिका को भी उच्चतम न्यायालय में स्थानांतरित कर दिया जाए। याचिका में कहा गया, ‘‘वंदे मातरम् हमारे इतिहास, संप्रभुता, एकता और गौरव का प्रतीक है। यदि कोई नागरिक किसी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष कृत्य से इसका अनादर करता है, तो यह न केवल एक असामाजिक कृत्य होगा, बल्कि एक संप्रभु राष्ट्र के नागरिक के रूप में हमारे सभी अधिकारों और हमारे अस्तित्व के लिए भी विनाशकारी होगा।’’

याचिका में कहा गया, ‘‘इसलिए, प्रत्येक नागरिक को न केवल ऐसे कृत्यों से बचना चाहिए, बल्कि यदि कोई उपद्रवी वंदे मातरम् का अनादर करे, तो उसे रोकने के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ प्रयास करना चाहिए। हमें अपने राष्ट्र, अपने संविधान, राष्ट्रगान और राष्ट्रीय ध्वज पर गर्व होना चाहिए तथा अपने निजी हितों से ऊपर राष्ट्रीय हित को रखना चाहिए, तभी हम अपनी कड़ी मेहनत से मिली स्वतंत्रता और संप्रभुता की रक्षा कर पाएंगे। वंदे मातरम् के गायन को बढ़ावा देने और उसका प्रसार करने के वास्ते एक राष्ट्रीय नीति तैयार करना कार्यपालिका का कर्तव्य है।’’ इस जनहित याचिका में यह सुनिश्चित करने का आग्रह किया गया है कि इस गीत को पूरा सम्मान मिले और इसे राष्ट्रगान के बराबर दर्जा दिया जाए। याचिकाकर्ता ने केंद्र और दिल्ली सरकार को यह निर्देश देने का भी अनुरोध किया है कि यह सुनिश्चित किया जाए कि प्रत्येक कार्यदिवस पर सभी स्कूलों और शैक्षणिक संस्थानों में ‘जन गण मन’ और ‘वंदे मातरम्’ दोनों गाए और बजाए जाएं।

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