अर्जी वाले भगवान गणेश के इस मंदिर में रजिस्टर में दर्ज होती है मनोकामना

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विघ्नहर्ता और रिद्धि सिद्धि के दाता, भगवान गणेश घर घर में विराज चुके हैं। गणेश जी के विभिन्न मंदिरों में अच्छी रौनक दिखाई दे रही है। भक्त गणेश मंदिर पहुंचकर बप्पा के दर्शन कर अपनी मनोकामना उन्हें बता रहे हैं। इसी कड़ी में मध्यप्रदेश के जबलपुर में मां नर्मदा तट के किनारे बने अर्जी वाले भगवान गणेश का मंदिर हैं, जो अपने आप में बेहद प्रचलित है। यहाँ हर साल भक्त अपनी अर्जी लेकर पहुंचते हैं। ऐसा माना जाता है कि अर्जी वाले भगवान गणेश के जो भी भक्त अपनी अर्जी लेकर यहाँ पहुंचता है भगवान उसकी मनोकामना जरूर पूरी करते हैं।

इस मंदिर में मनोकामना पूरी हो इसलिए भक्त अर्जी लगाते हैं। भगवान श्री गणेश के मंदिर में मनोकामना पूरी होने के लिए भक्त मंदिर में अर्जी लगाते हैं। इसके लिए बकायदा एक रजिस्टर में भक्तजन अपनी मनोकामना को दर्ज कराते हैं। इस रजिस्टर में व्यक्ति का नाम, पता और उसकी मनोकामना लिखी जाती है। इस दौरान भगवान गणेश के सामने मनोकामना वाला नारियल भी रखा जाता है।

भगवान गणेश के भक्त मनोकामना पूरी होने के बाद मंदिर में आकर अपनी मन्नत के अनुसार श्री गणेश को प्रसाद भी चढ़ाते हैं। प्रदेश की संस्कारधानी जबलपुर में बना भगवान गणेश का यह मंदिर अति प्राचीन है। मंदिर को लेकर भक्तों की असीम आस्था है, जहां श्रद्धालु मनोकामना पूरा होने के लिए अपनी अर्जी लगाते हैं। लोग नियमित तौर पर यहाँ बुधवार को बप्पा के दर्शन के लिए आते हैं, परन्तु गणेशोत्सव के दौरान 10 दिनों तक यहाँ भक्तों का तांता लगा रहता है। भगवान गणेश के ऐसे कई मंदिर है लेकिन इस मंदिर की पहचान अर्जी वाले गणेश के रूप में जानी जाती है। शहर में ही नही यह मंदिर अपनी अर्जी की विशेषता के चलते दूर-दूर तक प्रसिद्ध है। इस मंदिर को अर्जी गणेश के नाम से जानने का बड़ा कारण यह है की यहां लगाई जाने वालीं ढेरों अर्जियां, जिन्हें भक्त कागज में लिखकर देते हैं। इसे नारियल में बांधकर बप्पा के चरणों में अर्पित की जाती है। मंदिर निर्माण के लिए जब भूमि की खुदाई प्रारंभ हुई तो 4 फीट नीचे भगवान श्री गणेश की लगभग ढाई फीट उंची प्रतिमा मिली। मंदिर निर्माण के बाद इसी प्रतिमा को मंदिर में स्थापित किया गया।

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