नवरात्र के पहले दिन जरूर पढ़े या सुने माता शैलपुत्री की पौराणिक कथा

img

आज से शारदीय नवरात्रि की शुरुआत हो गई है। जी हाँ और यह नवरात्रि 09 दिनों तक चलने वाली है। आपको बता दें कि नवरात्रि का पहला दिन मां शैलपुत्री को समर्पित होता है। वहीं मार्केण्डय पुराण के अनुसार मां शैलपुत्री पर्वतराज यानी शैलराज हिमालय की पुत्री हैं। पर्वतराज हिमालय की पुत्री होने की वजह से उनका नाम शैलपुत्री पड़ा। ऐसा कहा जाता है कि माता शैलपुत्री का वाहन बैल है। इसके चलते उन्हें वृषारूढ़ा के नाम से भी जाना जाता है।

कहा जाता है मां शैलपुत्री का स्वरूप बहुत अद्भुत माना गया है जो बैल की सवारी करती हैं। वहीं उनके बाएं हाथ में कमल और दाएं हाथ में त्रिशूल होता है। जो भक्त मां शैलपुत्री की पूजा करता है वह भयमुक्त रहता है। इसी के साथ उसे शांति, यश, कीर्ति, धन, विद्या और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

माता शैलपुत्री की पौराणिक कथा- पौराणिक कथाओं के अनुसार एक बार राजा दक्ष ने अपने घर पर एक बड़े यज्ञ का आयोजन करवाया। इस यज्ञ में उन्होंने सभी देवी देवताओं और ऋषि मुनियों को आमंत्रित किया, लेकिन माता सती के पति यानि अपने दामाद भोलेनाथ को आमंत्रित नहीं किया। माता सती ने भगवान शिव से अपने पिता द्वारा आयोजित यज्ञ में जाने की अनुमति मांगी, माता सती की आग्रह पर भोलेनाथ ने उन्हें यज्ञ में जाने की अनुमति दे दी। जब माता सती यज्ञ में पहुंची तो उन्होंने देखा कि राजा दक्ष भगवान शिव के बारे में अपशब्द कह रहे थे। पति के इस अपमान को होते देख माता सती ने यज्ञ में कूदकर अपने प्राण त्याग दिए। यह समाचार सुन भगवान शिव ने अपने गणों को भेजकर दक्ष का यज्ञ पूरी तरह से विध्वंस करा दिया। इसके बाद सती ने शैलपुत्री के रूप में अगला जन्म पर्वतराज हिमालय के घर लिया।

Similar Post

LIFESTYLE

AUTOMOBILES

Recent Articles

Facebook Like

Subscribe

FLICKER IMAGES

Advertisement