इन मंत्रों के साथ ज्येष्ठ पूर्णिमा पर करें पूजा

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वर्ष में 2 बार वट सावित्री व्रत रखा जाता है, पहला ज्येष्ठ अमावस्या एवं दूसरा ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन. दोनों व्रत में पूजा-पाठ करने का विधान, कथा, नियम एवं महत्व एक जैसे ही होते हैं. इस दिन सुर्योदय से सुहागिनें पति की लंबी उम्र के लिए व्रत रखकर बरगद के वृक्ष की पूजा करती है. इस वर्ष वट सावित्री पूर्णिमा व्रत 3 जून 2023 को है. अखंड सौभाग्य की प्राप्ति के लिए वट सावित्री पूर्णिमा का व्रत बहुत अहम माना गया है. 

भगवान विष्णु और चंद्र देव की पूजा के मंत्र:-

  • पूर्णिमा के दिन रात में चंद्र देव को अर्घ्य देकर माता लक्ष्मी की पूजा करना परम सौभाग्यशाली बनाता है। चंद्र दोष कटता है और घर में धन वैभव में वृद्धि होती है। उनके मुताबिक, 3 जून को चंद्र व्यापिनी तिथि में पूर्णिमा पर चंद्रमा को अर्घ्य देते समय ऊँ सों सोमाय नम: मंत्र का जाप करना चाहिए। इसके अतिरिक्त जो व्रत नहीं रख रहे हैं, पूर्णिमा के दिन 4 जून को प्रभु श्रीराम के नाम का जप या ऊँ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का 108 बार जाप करें, यह सभी कष्टों को दूर करने वाला होता है।

ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन पूजा:-

  • ऐसे लोग जो ज्येष्ठ पूर्णिमा व्रत रख रहे हैं उन्हें प्रातः उठकर पूजा स्थल को स्वच्छ करना चाहिए।
  • गंगा नदी में स्नान कर सकें तो अच्छा वर्ना पानी में गंगाजल डालकर स्नान करें तथा व्रत का संकल्प लें।
  • तांबे के लोटे में अक्षत, कुमकुम, फूल आदि डालकर भगवान सूर्य को अर्घ्य दें।
  • इसके बाद प्रभु श्री विष्णु, माता लक्ष्मी और भगवान शंकर की विधि विधान से पूजा करें।
  • सभी के लिए धूप, दीप जलाएं, उनके प्रिय फूल और भोग लगाएं।
  • भगवान के मंत्रों का जाप, चालीसा आदि का पाठ करें।
  • आरती करें, उपयुक्त दान पुण्य करें।
  • * गलती के लिए क्षमा मांगें।

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