जानिये माँ चंद्रघंटा की पूजा का शुभ समय, मुहूर्त, पूजन विधि, मंत्र और महत्व के बारे में
आज नवरात्रि का तीसरा दिन है। आज के दिन दुर्गा मां के तीसरे स्वरूप देवी चंद्रघंटा की पूजा-उपासना की जाएगी। शारदीय नवरात्रि के प्रथम दिन मां शैलपुत्री, दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा लोगों ने पूरे विधि-विधान से की। मान्यता है कि आज आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मां चंद्रघंटा की पूजा करने से दांपत्य जीवन में खुशियां आती हैं। ऐसे में यदि आप चाहते हैं कि आपकी शादीशुदा जिंदगी सुखमय रहे तो आज के दिन देवी चंद्रघंटा की पूजा जरूर करें। श्रद्धा भाव से पूजा-अर्चना करने से मां की कृपा अपने भक्तों पर बनी रहती है और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। मां पार्वती का रौद्र रूप हैं मां चंद्रघंटा। पौराणिक कथाओं के अनुसार, मां पार्वती ने राक्षसों से युद्ध करने के लिए रौद्र रूप धारण किया था, ताकि इनसे मुक्ति मिल सके। जानते हैं मां चंद्रघंटा की विधि-विधान से पूजा करने के लिए शुभ समय, मुहूर्त, पूजन विधि, महत्व, मंत्र आदि के बारे में विस्तार से।
नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा करने का शुभ मुहूर्त
यदि आप जीवन में खुशहाली बनाए रखना चाहते हैं तो आज नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा नियमानुसार और शुभ मुहूर्त में ही करें तभी लाभ होगा।
पूजा करने के लिए शुभ समय
लाभ काल में सुबह 10 बजकर 45 मिनट से लेकर दोपहर 12 बजकर 10 मिनट तक है। अमृत काल में दोपहर 12 बजकर 11 मिनट से लेकर 01 बजकर 36 मिनट तक है। वहीं, शुभ काल में अपराह्न 03:03 से सायं 04:28 बजे तक शुभ मुहूर्त है।
मां चंद्रघंटा के पूजा मंत्र
“या देवी सर्वभूतेषु मां चंद्रघंटा रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै, नमस्तस्यै, नमस्तस्यै, नमो नमः।”
पिंडज प्रवरारूढा, चंडकोपास्त्रकैर्युता।
प्रसादं तनुते मह्यं, चंद्रघंटेति विश्रुता।।
ॐ देवी चन्द्रघण्टायै नमः॥
मां चंद्रघंटा को पसंद है ये भोग
मां दुर्गा के सभी स्वरूपों की पूजा करने के दौरान अलग-अलग तरह के भोग लगाए जाते हैं। मां चंद्रघंटा को आप भोग में सेब, केला, दूध की मिठाई, खीर आदि का भोग लगा सकते हैं, क्योंकि ये चीजें उनकी पसंदीदा हैं।
मां चंद्रघंटा की पूजा करने की विधि
सबसे पहले आप सुबह उठकर स्नान आदि से निवृत्त हो जाएं। पूजा घर की साफ-सफाई कर लें। मां चंद्रघंटा की तस्वीर या मूर्ति स्थापित करें। अब जलाभिषेक करें। नैवेद्य, दीप, सफेद कमल या लाल गुड़हल का फूल, कुमकुम, अक्षत, सिंदूर आदि अर्पित करें। पूजा के दौरान देवी के मंत्रों का उच्चारण करते रहें। उन्हें खीर, दूध से बनी मिठाइयों का भोग लगाएं। कथा सुनें या पढ़ें। आरती करने के बाद मां चंद्रघंटा से अपनी इच्छाओं की पूर्ति होने की प्रार्थना करें। उनसे आशीर्वाद मांगें।
मां चंद्रघंटा की पूजा का महत्व
मान्यता है कि मां चंद्रघंटा की पूजा करने से जातक को आरोग्य, चिरायु और सुखी-संपन्न होने का आशीर्वाद प्राप्त होता है। मां चंद्रघंटा के आशीष से जातक के सभी पाप व दुख-दर्द दूर हो जाते हैं।
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