एनजीटी ने महाकुंभ के दौरान जल में मल कोलीफॉर्म के स्तर ,नालियों की गाद जैसे मुद्दों पर विचार किया
नई दिल्ली, बुधवार, 31 दिसंबर 2025। राष्ट्रीय हरित अधिकरण ने 2025 में पर्यावरण से जुड़े कई गंभीर मुद्दों पर विचार किया, जिनमें महाकुंभ के दौरान प्रयागराज के विभिन्न स्थानों पर पानी में मल कोलीफॉर्म की उच्च मात्रा का पाया जाना और दिल्ली की नालियों की सफाई शामिल है। नयी दिल्ली स्थित अधिकरण ने उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को फटकार लगाते हुए पूछा कि क्या वह महाकुंभ के दौरान प्रयागराज के विभिन्न स्थानों पर पानी में मल कोलीफॉर्म की उच्च मात्रा पाए जाने के संबंध में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के निष्कर्ष से असहमत है। महाकुंभ, हिंदू समुदाय का एक प्रमुख पर्व है जो सूर्य के चारों ओर बृहस्पति की पूर्ण परिक्रमा का प्रतीक है और हर 12 साल में एक बार आयोजित किया जाता है।
यह पर्व प्रयागराज में 13 जनवरी (‘पौष पूर्णिमा’) से 26 फरवरी (‘महाशिवरात्रि’) तक आयोजित किया गया था और उस स्थान पर जल में मल कोलीफॉर्म का उच्च स्तर पाए जाने के कारण न्यायाधिकरण की जांच के दायरे में आया। सीपीसीबी ने 17 फरवरी को प्रयागराज के विभिन्न स्थानों पर स्नान के लिए प्राथमिक जल गुणवत्ता मानकों के अनुरूप न होने के संबंध में एक रिपोर्ट समिति को सौंपी थी। हालांकि, अगले महीने बोर्ड ने एक नई रिपोर्ट पेश की, जिसमें कहा गया कि सांख्यिकीय विश्लेषण के अनुसार प्रयागराज में महाकुंभ के दौरान जल की गुणवत्ता स्नान के लिए उपयुक्त थी। एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम में, न्यायाधिकरण ने दिल्ली सरकार के सिंचाई और बाढ़ नियंत्रण विभाग (आई एंड एफसीडी) को राष्ट्रीय राजधानी में 24 नालों की गाद निकालने का काम पूरा करने का निर्देश दिया।
हरित अधिकरण ने केंद्र से विभिन्न मुद्दों पर जवाब मांगा है, जैसे कि 2021 और 2023 के बीच असम के वन क्षेत्र में 86.66 वर्ग किलोमीटर की कमी, पौधों, जानवरों और मनुष्यों पर ‘रात में कृत्रिम प्रकाश’ का प्रतिकूल प्रभाव, मच्छरों को नियंत्रित करने के लिए जैविक एजेंट के रूप में उपयोग की जा रही दो अत्यधिक आक्रामक और विदेशी मछली प्रजातियां, और दक्षिण दिल्ली के संगम विहार के वन क्षेत्रों में अवैध रूप से विकसित कई कॉलोनियों की सही तथ्यात्मक स्थिति।
अधिकरण ने गुटखा, पान मसाला और तंबाकू उत्पादों के निर्माताओं द्वारा प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन नियमों के कड़ाई से पालन के संबंध में केंद्र सरकार से जवाब भी मांगा। अधिकरण ने यमुना नदी के तल पर अवैध रेत खनन से संबंधित एक मामले में दिल्ली के मुख्य सचिव और अन्य को भी नोटिस जारी किया। अधिकरण ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया है कि वे उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा जारी दिशानिर्देशों का पालन करें ताकि सड़कों के किनारे, सड़क के किनारे की मेड़ों और पेड़ों के आसपास के क्षेत्रों में अंधाधुंध कंक्रीटीकरण को रोका जा सके, जब तक कि इस संबंध में नए नियम नहीं बन जाते। इसने दिल्ली सरकार से राष्ट्रीय राजधानी में वृक्ष गणना करते समय वृक्षों को जियोटैग करने की व्यवहार्यता का पता लगाने का आग्रह किया।
राष्ट्रीय राजधानी के जनकपुरी इलाके में कई घरों में दूषित पानी की आपूर्ति का मामला सुर्खियों में रहा। यह मामला तब सामने आया जब सीपीसीबी ने न्यायाधिकरण को सूचित किया कि जनकपुरी के घरों से एकत्र किए गए नल के पानी के कई नमूनों में कोलीफॉर्म और ई. कोलाई बैक्टीरिया पाए जाने के कारण वे पीने योग्य नहीं हैं। अधिकरण द्वारा संबंधित अधिकारियों को फटकार लगाए जाने के बाद, दिल्ली जल बोर्ड ने उसे आश्वासन दिया कि जनकपुरी के एक ब्लॉक के निवासियों को स्वच्छ पेयजल की आपूर्ति होगी क्योंकि इस वर्ष ही एक नई पाइपलाइन बिछाई जाएगी।
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