संधियां राष्ट्रीय हित के आधार पर होनी चाहिए, न कि विदेशी सरकारों या निगमों के दबाव में : न्यायालय

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नई दिल्ली, शनिवार, 17 जनवरी 2026। उच्चतम न्यायालय ने कहा कि संधियां राष्ट्रीय हित के आधार पर होनी चाहिए, न कि विदेशी सरकारों या निगमों के दबाव में। न्यायालय ने यह भी कहा कि भारत को अंतरराष्ट्रीय कर समझौते करते समय अपनी कर संप्रभुता की रक्षा करनी चाहिए, निष्पक्षता सुनिश्चित करनी चाहिए और दुरुपयोग को रोकना चाहिए। न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला की ये टिप्पणियां उस फैसले के दौरान आईं, जिसमें शीर्ष अदालत ने घरेलू राजस्व अधिकारियों के उस निर्णय को बरकरार रखा, जिसके अनुसार अमेरिका स्थित निवेशक कंपनी ‘टाइगर ग्लोबल’ द्वारा 2018 में फ्लिपकार्ट से बाहर निकलने पर उत्पन्न पूंजीगत लाभ भारत में कर योग्य है। न्यायमूर्ति पारदीवाला ने एक अलग लेकिन सहमति वाला फैसला लिखा, जिसमें यह स्पष्ट किया गया कि भारत को अंतरराष्ट्रीय कर संधियों के प्रति किस तरह का व्यापक दृष्टिकोण अपनाना चाहिए।

उन्होंने कहा, ‘‘कर संधियां, अंतरराष्ट्रीय समझौते, प्रोटोकॉल और सुरक्षा उपाय अत्यंत सहभागी, पारदर्शी होने चाहिए और उनमें समय-समय पर समीक्षा की व्यवस्था होनी चाहिए। साथ ही संधि से बाहर निकलने के मजबूत प्रावधानों के साथ पुनः वार्ता की शक्ति भी होनी चाहिए, ताकि अनुचित परिणामों से बचा जा सके, राष्ट्र के रणनीतिक और सुरक्षा हितों की रक्षा हो, कर आधार के क्षरण तथा लोकतांत्रिक नियंत्रण के नुकसान या कमजोर पड़ने को रोका जा सके और संप्रभु के कराधान अधिकार की रक्षा के लिए स्पष्ट प्रावधान शामिल किए जा सकें।’’ न्यायमूर्ति पारदीवाला ने कहा, ‘‘संधियां राष्ट्रीय हित के आधार पर की जानी चाहिए, न कि विदेशी सरकारों या निगमों के दबाव से।’’ उच्चतम न्यायालय ने यह सुनिश्चित करने के लिए विस्तृत सुरक्षा उपायों का उल्लेख किया कि कर संधियां देश की आर्थिक संप्रभुता, राजस्व आधार और सार्वजनिक हित की रक्षा करें।

न्यायमूर्ति पारदीवाला ने सुझाव दिया कि अंतरराष्ट्रीय कर संधियों पर बातचीत या उनके नवीनीकरण के दौरान भारत को व्यापक सुरक्षा उपाय अपनाने चाहिए जिनमें फर्जी कंपनियों द्वारा संधि के दुरुपयोग को रोकने के लिए लाभ की सीमाओं जैसी धाराओं को शामिल करना और सामान्य कर बचाव निरोधक नियम जैसे घरेलू कानूनों को लागू करने की अनुमति देना शामिल है। उन्होंने कहा कि संधियों में केवल नौकरशाही या कूटनीतिक उद्देश्यों को ही नहीं, बल्कि व्यापक आर्थिक और सार्वजनिक हितों को भी प्रतिबिंबित होना चाहिए। गौरतलब है कि टाइगर ग्लोबल ने 2018 में फ्लिपकार्ट से बाहर निकलने का फैसला किया था, जब वॉलमार्ट इंक ने भारतीय ई-वाणिज्य कंपनी में नियंत्रक हिस्सेदारी हासिल की थी। इसके बाद टाइगर ग्लोबल ने फरवरी 2019 में इस मामले पर निर्णय के लिए आयकर विभाग से अग्रिम प्राधिकरण निर्णय हेतु संपर्क किया था।

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