एसवाईएल नहर के मुद्दे पर चर्चा के लिए पंजाब और हरियाणा के मुख्यमंत्रियों की बैठक

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चंडीगढ़, मंगलवार, 27 जनवरी 2026। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान और हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने काफी समय से लंबित सतलुज-यमुना लिंक (एसवाईएल) नहर मुद्दे पर चर्चा के लिए मंगलवार को यहां बैठक की। दोनों मुख्यमंत्रियों के बीच यहां एक होटल में बैठक हुई और इसमें दोनों सरकारों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। एसवाईएल नहर मुद्दा पिछले कई वर्षों से दोनों राज्यों के बीच विवाद का कारण रहा है।

पिछले साल मई में उच्चतम न्यायालय ने दशकों पुराने विवाद के सौहार्दपूर्ण समाधान के लिए दोनों राज्यों को केंद्र के साथ सहयोग करने का निर्देश दिया था। हाल में हुई सुनवाई में शीर्ष अदालत ने इस मामले में अगली सुनवाई अप्रैल में करना तय किया था।  एसवाईएल नहर की परिकल्पना दोनों राज्यों के बीच रावी और ब्यास नदियों के पानी के प्रभावी बंटवारे के लिए की गई थी। परियोजना में 214 किलोमीटर लंबी नहर की परिकल्पना की गई है जिसमें 122 किलोमीटर हिस्सा पंजाब में और शेष 92 किलोमीटर हरियाणा में बनाया जाना था। हरियाणा ने अपने क्षेत्र में परियोजना पूरी कर ली है लेकिन 1982 में काम शुरू करने वाले पंजाब ने इसे रोक दिया।

शीर्ष अदालत ने 1996 में हरियाणा द्वारा दायर मुकदमे में 15 जनवरी 2002 को उसके पक्ष में फैसला दिया था और पंजाब सरकार को एसवाईएल नहर का अपना हिस्सा बनाने का निर्देश दिया। पंजाब सरकार का कहना है कि राज्य के पास दूसरों के लिए अतिरिक्त पानी नहीं है और वह सिंधु नदी के पानी में ''अपने उचित हिस्से'' की मांग कर रही है। हरियाणा सरकार भी नदियों के पानी में अपना हिस्सा मांग रही है और उसका दावा है कि उसे एसवाईएल नहर का निर्माण न होने के कारण वह हिस्सा नहीं मिल रहा है।

न्यायालय के निर्देशों के बाद केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी आर पाटिल ने इस मुद्दे के समाधान के लिए पिछले साल नौ जुलाई को मान और सैनी की बैठक बुलाई थी। बाद में, उन्होंने पिछले वर्ष पांच अगस्त को दोनों मुख्यमंत्रियों की एक और बैठक बुलाई थी। इनमें से एक बैठक में मान ने विवाद के समाधान के लिए केंद्र से चिनाब नदी के पानी का उपयोग करने का आग्रह किया था और एसवाईएल नहर परियोजना को खत्म करने की मांग की थी। उन्होंने सतलुज-यमुना लिंक (एसवाईएल) नहर के बजाय यमुना-सतलुज लिंक (वाईएसएल) नहर का विचार भी रखते हुए कहा था कि सतलुज पहले ही सूख चुकी है और उसके पानी की एक बूंद भी साझा नहीं की जा सकती। मान ने कहा था कि इसके बजाय गंगा और यमुना नदियों का पानी सतलुज के जरिए पंजाब को दिया जाना चाहिए और उन्होंने एसवाईएल नहर को ''भावनात्मक मुद्दा'' बताया था।

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