शिवाजी-टीपू सुल्तान विवाद पर कांग्रेस ने भाजपा पर दोहरा मापदंड अपनाने का आरोप लगाया

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मुंबई, रविवार, 15 फरवरी 2026। कांग्रेस की महाराष्ट्र इकाई के नेता सचिन सावंत ने रविवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर ''दोहरे मापदंड'' अपनाने और ध्रुवीकरण का एजेंडा चलाने का आरोप लगाया।  उन्होंने छत्रपति शिवाजी महाराज की तुलना टीपू सुल्तान से करने को लेकर पार्टी के नेता हर्षवर्धन सपकाल की आलोचना के बीच यह आरोप लगाया है। एक बयान में कांग्रेस प्रवक्ता ने कई उदाहरणों का हवाला देते हुए दावा किया कि भाजपा नेताओं ने पहले सार्वजनिक स्थानों और आधिकारिक मंचों पर 18वीं सदी के मैसूर के शासक टीपू सुल्तान के संदर्भों का समर्थन या अनुमोदन किया था।

उन्होंने अकोला और मुंबई के नगर निकायों में पारित प्रस्तावों के साथ-साथ पूर्व के उन उदाहरणों का हवाला दिया, जहां भाजपा नेताओं ने कथित तौर पर टीपू सुल्तान की प्रशंसा की थी और उनसे जुड़ाव दर्शाया था। उन्होंने कहा कि पार्टी का वर्तमान विरोध राजनीतिक रूप से प्रेरित है। सावंत ने कहा कि भाजपा पहले टीपू सुल्तान की प्रशंसा करती थी, लेकिन अब अपने ध्रुवीकरण के एजेंडे के लिए उन्हें बुरा बता रही है। उन्होंने दावा किया, ''इस पाखंड को क्या नाम दिया जाए? टीपू सुल्तान भगवान राम के नाम वाली अंगूठी पहनते थे।'' उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा अब धार्मिक विभाजन पैदा करने की रणनीति के तहत टीपू सुल्तान को नकारात्मक रूप से चित्रित कर रही है, जबकि पहले पार्टी के नेताओं ने उनकी प्रशंसा की थी।

कांग्रेस नेता ने सत्तारूढ़ पार्टी पर ''विकृत धार्मिक राजनीति'' में लिप्त होने और मतदाताओं को ध्रुवीकृत करने का प्रयास करने का भी आरोप लगाया, साथ ही इस मुद्दे पर भाजपा के रुख को लेकर पार्टी का मत दोहराया। भाजपा पर ''दोहरे मापदंड'' का आरोप लगाते हुए सावंत ने कहा कि 2012 में पार्टी ने अकोला नगर निगम में एक प्रस्ताव पारित किया था जिसमें पूर्व महापौर और फिलहाल भाजपा के अकोला चुनाव प्रभारी विजय अग्रवाल ने स्थायी समिति हॉल का नाम 'शहीद-ए-वतन शेर-ए-मैसूर टीपू सुल्तान' रखने की बात कही गई थी। मालेगांव नगर निगम की उप महापौर शान-ए-हिंद निहाल अहमद के कार्यालय में टीपू सुल्तान के चित्र को लेकर शनिवार को राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया, जिसका वहां के शिवसेना पार्षदों और हिंदू संगठनों ने विरोध किया। उन्होंने दावा किया कि भाजपा नेता एवं कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री बी एस येदियुरप्पा ने टीपू सुल्तान के मकबरे का दौरा किया था और आगंतुक पुस्तिका में उनकी प्रशंसा में अपने विचार लिखे थे।

बुलढाणा में संवाददाताओं से मुखातिब सपकाल ने मालेगांव महानगरपालिका की उप-महापौर शान-ए-हिंद निहाल अहमद के कार्यालय में टीपू सुल्तान का चित्र लगाए जाने को लेकर हुए विवाद पर बात की, जिसका क्षेत्र के शिवसेना पार्षदों और हिंदू संगठनों ने विरोध किया था। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने छत्रपति शिवाजी महाराज की वीरता और 'स्वराज' के विचार को पेश करने के टीपू सुल्तान के तरीके का जिक्र करते हुए अंग्रेजों के खिलाफ युद्ध के उनके आह्वान का उदाहरण दिया और दावा किया कि यह लड़ाई शिवाजी महाराज के आदर्श की तर्ज पर थी।

कांग्रेस की महाराष्ट्र इकाई के अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल की मैसूर के 18वीं शताब्दी के शासक टीपू सुल्तान को छत्रपति शिवाजी महाराज के "समकक्ष" बताने वाली टिप्पणी को लेकर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि यह तुलना निंदनीय है और कांग्रेस नेता को खुद पर शर्म आनी चाहिए। टीपू सुल्तान इतिहास की एक विवादास्पद हस्ती हैं। जहां एक वर्ग अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई में उनकी वीरता की तारीफ करता है। वहीं, दूसरा वर्ग दक्षिण भारत के कई हिस्सों में हिंदुओं के साथ "दुर्व्यवहार" के लिए उनकी आलोचना करता है। इसके विपरीत, छत्रपति शिवाजी महाराज को उनकी सैन्य प्रतिभा के साथ-साथ परोपकार और सामाजिक कल्याण पर आधारित प्रशासनिक कौशल के लिए व्यापक रूप से सराहा जाता है।

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