बंगाल के सीमावर्ती जिलों में एसआईआर जांच से पहले न्यायिक अधिकारियों ने की सुरक्षा बढ़ाने की मांग
कोलकाता, मंगलवार, 24 फरवरी 2026। उच्चतम न्यायालय ने चुनाव आयोग को ओडिशा, बिहार और झारखंड जैसे पड़ोसी राज्यों से जिस दिन न्यायिक अधिकारियों की तैनाती कर विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया, उसी दिन भारत-बांग्लादेश सीमा से सटे पश्चिम बंगाल के चार जिलों में तैनात न्यायिक अधिकारियों ने सुरक्षा में चूक की सूचना देते हुए अतिरिक्त सुरक्षा की औपचारिक मांग की है। बांग्लादेश के साथ लंबी सीमा साझा करने वाले मालदा, मुर्शिदाबाद, उत्तर 24 परगना और दक्षिण 24 परगना में तैनात न्यायिक अधिकारियों ने तार्किक विसंगति श्रेणी के तहत चिह्नित मतदाताओं के दस्तावेजों के निस्तारण के दौरान स्थानीय लोगों द्वारा हमले की आशंका जताते हुए अतिरिक्त सुरक्षा की मांग की है।
पिछले सप्ताह शीर्ष अदालत द्वारा जारी निर्देशों के अनुरूप सोमवार से चुनावी राज्य पश्चिम बंगाल में तार्किक विसंगति श्रेणी के अंतर्गत चिह्नित मतदाताओं के दस्तावेजों की न्यायिक जांच शुरू हो गयी है, जिसमें सत्यापन प्रक्रिया पर न्यायिक निगरानी अनिवार्य की गयी है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ), पश्चिम बंगाल कार्यालय के सूत्रों ने बताया कि निर्वाचन आयोग ने न्यायिक अधिकारियों द्वारा जतायी गयी चिंताओं का संज्ञान लिया है और राज्य पुलिस प्रशासन को व्यापक सुरक्षा मुहैया कराने के निर्देश दिये हैं, ताकि जांच प्रक्रिया निर्बाध रूप से चल सके।
अधिकारियों के अनुसार, राज्यभर में न्यायिक जांच के लिए भेजे गये लगभग 50 लाख मतदाताओं के दस्तावेजों में सबसे अधिक संख्या मुर्शिदाबाद जिले से संबंधित है, हालांकि आयोग ने अब तक जिला-वार आंकड़े आधिकारिक रूप से जारी नहीं किये हैं। सीईओ कार्यालय के सूत्रों ने बताया कि न्यायिक अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिये गये हैं कि वे प्रत्येक दस्तावेज को स्वीकार या अस्वीकार करने के कारणों को विस्तार से दर्ज करें। साथ ही, उन्हें प्रतिदिन जांच की प्रगति रिपोर्ट कलकत्ता उच्च न्यायालय को सौंपनी होगी, जो उच्चतम न्यायालय के हस्तक्षेप के बाद से इस प्रक्रिया की निगरानी कर रहा है।
मौजूदा कार्यक्रम के अनुसार, पश्चिम बंगाल की अंतिम मतदाता सूची 28 फरवरी को प्रकाशित की जानी है, जिसमें वे मामले शामिल नहीं होंगे जो न्यायिक जांच के अधीन हैं। प्रक्रिया पूरी होने के बाद अनुपूरक मतदाता सूची जारी की जाएगी, जिसमें न्यायिक जांच से स्वीकृत योग्य मतदाताओं के नाम जोड़े जाएंगे। वरिष्ठ अधिकारियों ने माना कि एक बड़ी चिंता यह है कि लगभग 50 लाख दस्तावेजों की न्यायिक जांच निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरी हो पाएगी या नहीं।
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