राम मंदिर चढ़ावा विवाद की जांच संबंधी याचिकाओं पर 13 जुलाई को सुनवाई करेगा न्यायालय
नई दिल्ली, शुक्रवार, 10 जुलाई 2026। उच्चतम न्यायालय अयोध्या स्थित राम मंदिर में चढ़ावे की कथित हेराफेरी की निष्पक्ष और समयबद्ध जांच के अनुरोध वाली याचिकाओं पर 13 जुलाई को सुनवाई करेगा। सात जुलाई को अयोध्या की एक अदालत ने राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी के मामले में गिरफ्तार आठ आरोपियों में से तीन को एक दिन की पुलिस रिमांड पर भेजने की अनुमति दी थी। अदालत ने अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा और करुणेश पांडेय की पुलिस रिमांड मंजूर की थी। इससे पहले 29 जून को स्थानीय अदालत ने सभी आठ आरोपियों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया था।
उच्चतम न्यायालय की वेबसाइट के अनुसार, भारत के प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायामूर्ति वी. मोहना की पीठ सोमवार को अदालत की कार्यवाही फिर से शुरू होने पर इस मामले से जुड़ी तीन याचिकाओं पर सुनवाई करेगी। तीन याचिकाकर्ताओं में से एक नरेंद्र कुमार गोस्वामी ने घटना की केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से जांच कराने का अनुरोध किया है। उन्होंने राम मंदिर का प्रबंधन करने वाले श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के वित्तीय लेन-देन का भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) से ऑडिट कराने का भी अनुरोध किया है। दूसरी याचिका अजय कुमार राय और दिनेश कुमार यादव ने दायर की है, जिसमें इसी तरह के अनुरोध किए गए हैं। वहीं, तीसरी याचिका राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के सांसद सुधाकर सिंह ने दायर की है। इसमें उच्चतम न्यायालय की निगरानी में सीबीआई जांच के साथ-साथ ट्रस्ट के पूरे वित्तीय लेन-देन का फॉरेंसिक ऑडिट कराने का अनुरोध किया गया है। इससे पहले न्यायमूर्ति बी. वी. नागरत्ना की अध्यक्षता वाली अवकाशकालीन पीठ ने एक याचिकाकर्ता से मामले को शीघ्र सुनवाई के लिए बाद की किसी तारीख पर सूचीबद्ध कराने का आग्रह करने को कहा था।
अधिवक्ता अजय कुमार राय और दिनेश कुमार यादव द्वारा दायर याचिका में कहा गया है कि सीबीआई के नेतृत्व में विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित कर श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कामकाज, प्रशासन और कथित वित्तीय अनियमितताओं सहित अन्य कथित अनियमितताओं की जांच कराई जानी चाहिए। अजय कुमार राय ने अपनी याचिका में केंद्र सरकार, उत्तर प्रदेश सरकार और ट्रस्ट को आवश्यक नियामक, निगरानी और ऑडिट तंत्र गठित एवं लागू करने के निर्देश देने का भी अनुरोध किया है, ताकि जनहित की रक्षा हो सके और करोड़ों श्रद्धालुओं एवं दानदाताओं का विश्वास कायम रहे।
याचिका में कहा गया है, ''श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से जुड़ी धनराशि के कथित गायब होने और अन्य कथित अनियमितताओं की खबरें अंततः सही साबित हों या नहीं, लेकिन इन खबरों ने उन पीढ़ियों में गहरी चिंता पैदा की है, जिन्होंने अयोध्या की गौरवपूर्ण विरासत की पुनर्स्थापना के लिए लंबे समय तक संघर्ष किया।'' याचिका में यह भी कहा गया है कि उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित एसआईटी ने प्राथमिकी या किसी नियमित आपराधिक मामला दर्ज किए बिना ही जांच शुरू कर दी। याचिका के अनुसार, ट्रस्ट से जुड़े कथित धन के गबन और अन्य वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों की सच्चाई का स्वतंत्र रूप से सत्यापन ऐसी पेशेवर जांच एजेंसी द्वारा किया जाना चाहिए जिसके पास जटिल वित्तीय और आपराधिक मामलों की जांच के लिए आवश्यक विशेषज्ञता, संसाधन और संस्थागत व्यवस्था उपलब्ध हो।
याचिका में कहा गया है, ''ऐसी जांच से जनता का भरोसा ज़्यादा बढ़ेगा, बजाय उस शुरुआती जांच के जो प्रशासनिक अधिकारियों वाला विशेष जांच दल करता है, जिनके पास शायद आपराधिक जांच में विशेषज्ञता वाली योग्यता न हो।'' याचिका में यह भी कहा गया है कि यह मामला केवल संभावित संज्ञेय अपराधों तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था, भावनाएं और सार्वजनिक विश्वास भी सीधे तौर पर जुड़ा हुआ है। गौरतलब है कि 13 जून को उत्तर प्रदेश सरकार ने राम मंदिर में चढ़ावे के कथित गबन के आरोपों के बाद मंदिर ट्रस्ट के अनुरोध पर एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया था। इस एसआईटी में लखनऊ मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत, पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) किरण एस और विशेष सचिव (वित्त) नील रतन को सदस्य बनाया गया है।
Similar Post
-
अल्कोहल की 12 प्रतिशत से अधिक मात्रा वाली दवाइयों के लिए लाइसेंस अनिवार्य
नई दिल्ली, शुक्रवार, 10 जुलाई 2026। केंद्र ने उन दवाओं को लाइसें ...
-
राम मंदिर चढ़ावा विवाद की जांच संबंधी याचिकाओं पर 13 जुलाई को सुनवाई करेगा न्यायालय
नई दिल्ली, शुक्रवार, 10 जुलाई 2026। उच्चतम न्यायालय अयोध्या स्थ ...
-
मुंबई-पुणे रेल मार्ग बाधित: मध्य रेलवे ने 30 ट्रेन 17 जुलाई तक रद्द कीं
मुंबई, शुक्रवार, 10 जुलाई 2026। भोर घाट खंड में हुए भूस्खलन के बा ...
