जल जीवन मिशन की शुरुआत के बाद ग्रामीण नल कनेक्शन 17 से बढ़कर 82 फीसदी हुएः राष्ट्रपति

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नई दिल्ली, मंगलवार, 10 मार्च 2026। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बुधवार को कहा कि जल जीवन मिशन की शुरुआत के समय 2019 में जहां केवल 17 प्रतिशत ग्रामीण परिवारों के पास नल से जल कनेक्शन थे, वहीं अब यह बढ़कर 82 प्रतिशत हो गए हैं। जल महोत्सव कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि भारत में जल केवल एक बुनियादी सुविधा नहीं है, बल्कि यह देश की संस्कृति, परंपराओं, आजीविका और सामुदायिक जीवन से गहराई से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा, "यह अत्यंत संतोष की बात है कि वर्तमान में लगभग 82 प्रतिशत ग्रामीण परिवारों को नल से जल की सुविधा प्राप्त है, जबकि 2019 में जब जल जीवन मिशन शुरू किया गया था तब यह आंकड़ा केवल 17 प्रतिशत था। इस असाधारण सफलता के लिए मैं केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी आर पाटिल और उनकी पूरी टीम को बधाई देती हूं।"

राष्ट्रपति ने कहा, "जल जीवन का आधार है। हमारी परंपराओं में जल को अनेक रोगों के उपचार के रूप में भी पूजनीय माना गया है। हमारे राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम्' — जिसकी रचना की 150वीं वर्षगांठ हम मना रहे हैं — का पहला शब्द 'सुजलाम्' है, जिसका अर्थ है 'उत्तम जल संसाधनों से समृद्ध'। इस प्रकार भारत में जल केवल एक मूलभूत सुविधा नहीं रहा है; यह हमारी संस्कृति, परंपराओं, आजीविका और सामुदायिक जीवन से गहराई से जुड़ा हुआ है।" मुर्मू ने रेखांकित किया कि पहले ग्रामीण परिवारों को पीने के पानी तक पहुंच के लिए काफी संघर्ष करना पड़ता था और महिलाओं व बच्चों को अक्सर इसे लाने के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी। उन्होंने कहा कि आज स्वच्छ और सुरक्षित जल घरों तक पहुंच रहा है, जो जल जीवन मिशन की सफलता को दर्शाता है।

राष्ट्रपति ने बुधवार को 'विश्व प्लंबिंग दिवस' होने का उल्लेख करते हुए जल स्वास्थ्य, स्वच्छता और जल आपूर्ति सुनिश्चित करने को लेकर सभी प्लंबरों और तकनीशियनों के योगदान की सराहना की। राष्ट्रपति ने कहा ''जल संरक्षण एक सामूहिक उत्तरदायित्व है। हमें जल को केवल एक वस्तु नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक अमूल्य धरोहर के रूप में देखना चाहिए। अपने भविष्य को सुरक्षित करने के लिए हमें जल संरक्षण को अपने जीवन का अभिन्न अंग बनाना होगा। युवा पीढ़ी में जल प्रबंधन और संरक्षण के प्रति जागरूकता से भविष्य में देश की जल सुरक्षा सुनिश्चित होगी।'' उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि 'जल महोत्सव' भारत की जल सुरक्षा के लिए एक जन आंदोलन का माध्यम बनेगा।

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