ब्रिटेन की अदालत का नीरव मोदी के प्रत्यर्पण के खिलाफ मामले को फिर से खोलने से इनकार

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नई दिल्ली, गुरुवार, 26 मार्च 2026। लंदन उच्च न्यायालय ने भारत सरकार द्वारा अपने ‘नोट वर्बल’ में दिए गए ‘‘आश्वासनों की गुणवत्ता’’ पर भरोसा करते हुए भगोड़े हीरा व्यापारी नीरव मोदी की प्रत्यर्पण के खिलाफ मामले को फिर से खोलने की याचिका को खारिज कर दिया। ‘नोट वर्बल’ एक औपचारिक, बिना हस्ताक्षर वाला राजनयिक संदेश होता है जो आमतौर पर दूतावासों और विदेश मंत्रालयों के बीच सूचना, अनुरोध या विरोध व्यक्त करने के लिए उपयोग किया जाता है। पंजाब नेशनल बैंक से 13,000 करोड़ रुपये के धोखाधड़ी मामले में वांछित मोदी ने भगोड़े आर्थिक अपराधी संजय भंडारी के मामले में आए फैसले के आधार पर अपने मामले को फिर से खोलने के लिए लंदन की अदालत से संपर्क किया था। भारतीय एजेंसियों द्वारा यातना दिए जाने की आशंका के मद्देनजर भंडारी के प्रत्यर्पण को रद्द कर दिया गया था।

लंदन उच्च न्यायालय ने मानवाधिकार के आधार पर भंडारी को प्रत्यर्पण आदेश से मुक्त कर दिया था। मोदी के मामले को दोबारा खोलने की अनुमति देने से इनकार करते हुए लंदन उच्च न्यायालय के किंग्स बेंच डिवीजन में लॉर्ड जस्टिस स्टुअर्ट स्मिथ और जस्टिस जे की पीठ ने कहा कि वे भारत सरकार द्वारा अपने ‘नोट वर्बल’ में दिए गए ‘‘आश्वासनों की गुणवत्ता’’ पर भरोसा करते हैं। ब्रिटेन की अदालत ने अपने फैसले में कहा, ‘‘जब मोदी का मामला 2022 में हमारे सामने आया तो भंडारी मामले में दिए गए फैसले के आधारभूत तथ्य या तो उपलब्ध नहीं थे या हमारी जानकारी में नहीं लाए गए थे। भंडारी मामले में इस अदालत का फैसला प्रतिबंधित उपचारों के इस्तेमाल से इकबालिया बयान हासिल करने की एक चिंताजनक तस्वीर पेश करता है।’’

अदालत ने कहा, ‘‘सितंबर 2025 और फरवरी 2026 के बीच भारत सरकार द्वारा दिए गए बयानों और आश्वासनों को हम काफी महत्व देते हैं। ये बयान और आश्वासन बाद में ‘नोट वर्बल’ में परिणत हुए। अगर ऐसा नहीं होता तो हम असाधारण शक्ति का प्रयोग करते हुए इस अपील को फिर से खोलने पर विचार करते।’’ पीठ ने इस दलील को खारिज कर दिया कि मुंबई में जेल से अधीनस्थ अदालत तक के मार्ग में ‘‘उन्हें यातना या अन्य दुर्व्यवहार का सामना करने का खतरा’’ है। अदालत ने कहा कि उसने भारत सरकार के आश्वासनों पर बहुत सावधानीपूर्वक विचार किया है।

जांच अधिकारियों समेत केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) के अधिकारियों का एक दल सुनवाई के लिए लंदन गया था। सीबीआई प्रवक्ता ने बुधवार को यहां एक बयान में कहा, ‘‘भंडारी के मामले में फैसले के आधार पर पुन: सुनवाई के लिए आवेदन दायर किया गया था। हालांकि, सीबीआई के निरंतर और समन्वित प्रयासों से इस चुनौती को सफलतापूर्वक पार कर लिया गया।’’ उन्होंने कहा, ‘‘सीबीआई सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक में बड़े पैमाने पर वित्तीय गड़बड़ी से जुड़े पंजाब नेशनल बैंक घोटाले के संबंध में नीरव मोदी के प्रत्यर्पण की मांग कर रही है, जिसकी कार्यवाही 2018 से जारी है।’’

उन्होंने बताया कि ब्रिटेन की अदालतों ने 2019 में मोदी की गिरफ्तारी के बाद उनके प्रत्यर्पण को मंजूरी दे दी और उनकी पिछली अपील को खारिज कर दिया क्योंकि अदालतों ने कोई कानूनी बाधा नहीं पाई और भारत में उनके साथ उचित व्यवहार के आश्वासनों को स्वीकार किया। मोदी पर अपने चाचा मेहुल चोकसी के साथ मिलकर सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक को कथित तौर पर धोखा देने का आरोप है। वह 19 मार्च, 2019 से ब्रिटेन की जेल में बंद हैं। प्रवक्ता ने बताया कि मोदी ने अकेले ही 6,498.20 करोड़ रुपये की हेराफेरी की थी।

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