विपक्ष ने ईंधन पर उत्पाद शुल्क में हुई कटौती को देर से उठाया गया कदम बताया

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नई दिल्ली, शुक्रवार, 27 मार्च 2026। विपक्ष ने ईंधन पर उत्पाद शुल्क में केंद्र सरकार की ओर से की गई कटौती को “देर से उठाया गया कदम” करार देते हुए कहा कि यह फैसला पश्चिम बंगाल, असम और अन्य राज्यों में होने वाले चुनावों को ध्यान में रखकर लिया गया है। सरकार ने पेट्रोल पर उत्पाद शुल्क घटाकर तीन रुपये प्रति लीटर कर दिया है और डीजल से पूरी तरह शुल्क हटा दिया है। विपक्ष ने पश्चिम एशिया संकट पर मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक बुलाने की पहल को भी देर से उठाया गया कदम बताया और कहा कि इस संकट की शुरुआत में ही व्यापक स्तर पर चर्चा होनी चाहिए थी।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आज दिन में चुनाव वाले राज्यों को छोड़कर बाकी सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ बातचीत करेंगे और पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच उनकी तैयारियों एवं योजनाओं की समीक्षा करेंगे। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने कहा कि उत्पाद शुल्क में हुई यह कटौती आम लोगों को राहत देने के लिए की गई है। तृणमूल कांग्रेस की सांसद सागारिका घोष ने सरकार की “प्रतिक्रियात्मक” नीति की आलोचना की और फैसले के समय पर सवाल उठाया।

उन्होंने संसद परिसर में पत्रकारों से कहा, “उत्पाद शुल्क में कमी सरकार की विफलता को दर्शाती है। पिछले तीन हफ्तों से मोदी सरकार कह रही थी कि सब कुछ ठीक है और आपूर्ति पर्याप्त है। अब उन्होंने शुल्क कम किया है क्योंकि स्थिति आपातकालीन हो गई है। यह सरकार पहले से कदम उठाने के बजाय केवल बड़े संकट के समय ही कदम उठाती है।”

कांग्रेस सांसद तारिक अनवर ने कहा कि सरकार को पहले ही कार्रवाई करनी चाहिए थी। उन्होंने कहा, “सरकार ने यह कदम बहुत देर से उठाया है। प्रधानमंत्री के फैसलों में हमेशा देरी होती है। विपक्षी नेताओं और मुख्यमंत्रियों के साथ सहयोग एवं संवाद पहले होना चाहिए था।”

शिवसेना (उबाठा) की सांसद प्रियंका ने आरोप लगाया कि चुनाव को ध्यान में रखकर उत्पाद शुल्क में कटौती की गई। उन्होंने कहा, “अगर वास्तव में राहत देना मकसद था, तो जब ईरान-इजराइल संघर्ष शुरू हुआ था, तब एलपीजी की कीमतों में 60 रुपये से अधिक की बढ़ोतरी नहीं की जानी चाहिए थी। अब जब चुनाव नजदीक हैं और महंगाई बढ़ रही है, तो सरकार ने शुल्क कम किया है। हालांकि आशंका है कि चुनाव खत्म होने के बाद फिर से शुल्क बढ़ाया जा सकता है।”

राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के सांसद अभय कुशवाहा ने इस फैसले का समर्थन किया और पारदर्शिता एवं संवाद की आवश्यकता पर जोर दिया।

उन्होंने कहा, “मौजूदा वैश्विक स्थिति को देखते हुए पेट्रोलियम और उर्वरकों की कमी हो सकती है। इस संदर्भ में सरकार का फैसला उचित लगता है। लेकिन केंद्र सरकार को सभी राज्यों के साथ स्थिति पर स्पष्ट संवाद करना चाहिए। सरकार को पारदर्शिता बनाए रखनी चाहिए और जनता के सामने सच्चाई रखनी चाहिए कि स्थिति क्या है और इससे कैसे निपटा जाएगा।”

भाजपा नेताओं ने सरकार के कदम का बचाव किया और कहा कि संकट के समय वह हमेशा परामर्श की प्रक्रिया अपनाती रही है।

केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस फैसले को समयानुकूल और आवश्यक बताया। उन्होंने कहा, “देश की ओर से मैं प्रधानमंत्री को धन्यवाद देता हूं कि उन्होंने मुश्किल घड़ी में सही निर्णय लिया। अर्थव्यवस्था को स्थिर रखने और नागरिकों खासकर आम आदमी और गरीब लोगों के हितों को ध्यान में रखते हुए सरकार ने उत्पाद शुल्क घटाया है। महंगाई और सार्वजनिक परिवहन पर पड़ने वाले बोझ को देखते हुए यह एक उचित कदम है।”

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने हमेशा देश को विश्वास में लेकर काम किया है, उन्होंने संसद के दोनों सदनों को संबोधित किया और अब मुख्यमंत्रियों से बातचीत करेंगे। भाजपा सांसद दिनेश शर्मा ने कहा कि संकट से निपटने के लिए केंद्र और राज्यों के बीच समन्वय जरूरी है। उन्होंने कहा, “कोविड के दौरान भी प्रधानमंत्री ने सभी मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक कर सामूहिक रणनीति बनाई थी। केवल केंद्र के भरोसे संकट से नहीं निपटा जा सकता, इसमें राज्यों की सक्रिय भागीदारी जरूरी है। विपक्ष को इस दृष्टिकोण से सीख लेनी चाहिए।”

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