एक महीने में 11 फीसदी लुढ़का सेंसेक्स

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  • छह साल में पहली बार सालाना गिरावट

पश्चिम एशिया संकट के कारण मार्च में प्रमुख सूचकांकों में 11 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गयी है और कोरोना काल के बाद छह साल में पहली बार वित्त वर्ष के दौरान इसने नकारात्मक रिटर्न दिया है। वित्त वर्ष 2025-26 के आखिरी कारोबारी दिवस पर सोमवार को बीएसई का सेंसेक्स 71,947.55 अंक पर बंद हुआ। पूरे वित्त वर्ष के दौरान इसमें 5,467.37 अंक यानी 7.06 प्रतिशत की गिरावट देखी गयी। वित्त वर्ष 2019-20 के बाद यह पहला मौका है जब सेंसेक्स ने नकारात्मक रिटर्न दिया है। कोरोना के कारण लॉकडाउन लगने से मार्च 2020 में शेयर बाजारों में भारी गिरावट रही थी और 2019-20 में सेंसेक्स 23.80 प्रतिशत टूटा था।

खास बात यह रही कि पहले 11 महीने में फरवरी 2026 तक सेंसेक्स 3,872.27 अंक ऊपर था, लेकिन मार्च में यह 9,339.64 अंक यानी 11.49 प्रतिशत का गोता लगा गया। पश्चिम एशिया संकट के कारण एक तरफ निवेशक बाजार में जोखिम लेने से कतरा रहे हैं तो दूसरी तरफ रुपया कमजोर होता जा रहा है। रुपये के लगातार गिरने से विदेशी संस्थागत निवेशक भारतीय पूंजी बाजार से पैसा निकाल रहे हैं। अकेले इक्विटी में एक लाख करोड़ रुपये से अधिक की बिकवाली की है। इससे शेयर बाजार में बड़ी गिरावट देखी जा रही है।

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी-50 सूचकांक मार्च में 2,847.25 अंक यानी 11.31 प्रतिशत लुढ़ककर 22,331.40 अंक पर बंद हुआ। पूरे वित्त वर्ष के दौरान इसमें 1,187.95 अंक (5.05 प्रतिशत) की गिरावट रही। बड़ी कंपनियों के विपरीत मझौली कंपनियों ने मार्च में बड़ी गिरावट के बावजूद पूरे वित्त वर्ष के दौरान सकारात्मक रिटर्न दिया। निफ्टी मिडकैप-50 सूचकांक 421.75 अंक (2.90 प्रतिशत) की बढ़त से साथ 14,983.35 अंक पर पहुंच गया। मार्च में सूचकांक 10.63 प्रतिशत टूटा है। छोटी कंपनियों के स्मॉलकैप-100 सूचकांक में सालाना 891.90 अंक यानी 5.54 प्रतिशत की गिरावट रही। मार्च में यह 10.19 फीसदी टूटा है।रुपया फिलहाल रिकॉर्ड निचले स्तर पर है। यह सोमवार को पहली बार 95 रुपये प्रति डॉलर के पार निकल गया।

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