परिसीमन से दक्षिणी राज्यों की आवाज दब जाएगी: चिदंबरम

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कोयंबटूर (तमिलनाडु), बुधवार, 15 अप्रैल 2026। केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित परिसीमन प्रक्रिया का विरोध करते हुए, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम ने बुधवार को दावा किया कि इस कदम से दक्षिणी राज्यों की राजनीतिक आवाज दब जाएगी। उन्होंने कहा कि केरल और कर्नाटक जैसे दक्षिणी राज्य भी इससे चिंतित हैं। उन्होंने 16 अप्रैल से संसद सत्र आयोजित किए जाने को ''सुनियोजित साजिश'' करार देते हुए कहा कि इसका उद्देश्य चुनाव प्रचार में व्यस्त तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल के सांसदों को सत्र में भाग लेने से रोकना है। कांग्रेस द्वारा इन दोनों राज्यों में चुनावों का हवाला देते हुए सत्र स्थगित करने के अनुरोध का जिक्र करते हुए उन्होंने पूछा, ''चुनावों के बाद संसद सत्र आयोजित करने में क्या खतरा है?'' उन्होंने कहा, ''चुनावों के दौरान इस समय संसद सत्र आयोजित करने की कोई हड़बड़ी नहीं है। तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में चुनाव संबंधी कार्यों के कारण कुल 67 सदस्य सत्र में भाग नहीं ले पाएंगे।''

चिदंबरम ने कहा कि लोकसभा में तमिलनाडु का वर्तमान प्रतिनिधित्व 39 है और यह बढ़कर 58 हो सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि लोकसभा में दक्षिणी राज्यों की आवाज दबाई जाएगी। उन्होंने परिसीमन विधेयक को नाकाम करने और एकमत होकर इसका विरोध करने का आह्वान किया। चिदंबरम ने 50 प्रतिशत सीटों की वृद्धि और राज्य में परिसीमन के प्रतिकूल प्रभावों पर चिंता व्यक्त की। कांग्रेस नेता ने कहा, ''अन्नाद्रमुक के महासचिव पलानीस्वामी की परिसीमन पर प्रतिक्रिया चौंकाने वाली है, जिसमें उन्होंने अमित शाह के इस आश्वासन का हवाला दिया है कि इससे तमिलनाडु प्रभावित नहीं होगा।'' चिदंबरम ने लोगों से केंद्र द्वारा शुरू की गई परिसीमन प्रक्रिया का विरोध करने की भी अपील की।

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