कौशल शिक्षा का उपयोग राष्ट्र के सर्वांगीण विकास के लिए होना चाहिए- राज्यपाल

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  • विश्वकर्मा कौशल विश्वविद्यालय का द्वितीय दीक्षांत समारोह आयोजित

जयपुर, बुधवार, 22 अप्रैल 2026। राज्यपाल श्री हरिभाऊ बागडे ने कहा कि कौशल शिक्षा का उपयोग राष्ट्र के सर्वांगीण विकास के लिए होना चाहिए। उन्होंने  कहा कि जिसके पास अच्छा कौशल है, उसे सभी स्थानों पर काम मिलता है। वह कभी भूखा नहीं रहता। उन्होंने कौशल शिक्षा के साथ विश्वविद्यालयों में नैतिक शिक्षा को बढ़ावा दिए जाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि नैतिक मूल्यों की शिक्षा से भौतिक विकास की गुणवत्ता में वृद्धि होती है। राज्यपाल बागडे बुधवार को विश्वकर्मा कौशल विश्वविद्यालय के द्वितीय दीक्षांत समारोह में संबोधित कर रहे थे। उन्होंने विश्वविद्यालय द्वारा प्रति वर्ष दीक्षांत समारोह आवश्यक रूप से किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि दीक्षांत समारोह  भले ही छोटे स्तर पर ही हो, परंतु नियमित होना चाहिए।  जो विद्यार्थी विश्वविद्यालय में पढ़ते हैं, उन्हें समय पर डिग्री मिलनी चाहिए। इससे उन्हें दिशा मिलती है।

बागडे ने कहा कि प्रतिभाशाली राष्ट्र के लिए कौशल विकास के साथ विद्यार्थियों को नैतिकता का पाठ भी पढ़ाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि बच्चों की बौद्धिक क्षमता बढ़ाने के साथ उन्हें नकल करने की प्रवृत्ति से रोके जाने की शिक्षा दी जाए। उन्होंने इसके लिए शिक्षकों को स्वयं को अपडेट रखते हुए शिक्षा का प्रभावी विकास करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति में अच्छा नागरिक बनाने के साथ आदर्श आचरण पर विशेष जोर दिया गया है।

बागडे ने कहा कि 2 फरवरी 1835 में लॉर्ड मैकाले ने जो उद्बोधन दिया, उसमें कहा था कि भारत को अब और अधिक गुलाम नहीं रखा जा सकेगा। उन्हें यदि गुलाम रखना है तो उनकी शिक्षा पद्धति बदलनी होगी। अंग्रेजों ने यही किया। इसी से देश लंबे समय तक गुलाम था। राज्यपाल  ने कहा कि आजादी से पहले देश में आठ लाख से अधिक गुरुकुल थे। इनमें सभी तरह की शिक्षा दी जाती थी। अंग्रेजों ने भारत की इस शिक्षा को बदल कर गुलाम मानसिकता की शिक्षा प्रदान की।

राज्यपाल ने कहा कि आजादी मिली तब आचार्य विनोबा भावे ने कहा था कि जिस तरह से यूनियन जैक बदलकर तिरंगा किया गया, वैसे ही देश की शिक्षा पद्धति बदली जानी चाहिए थी पर ऐसा नहीं हुआ। आजादी के बाद अब "नई शिक्षा नीति 2020" पूरी तरह से भारतीय परिपेक्ष्य में बनी है। इसमें विद्यार्थियों की बौद्धिक क्षमता बढ़ाए जाने के साथ उनके सर्वांगीण विकास पर ध्यान दिया गया है। श्री बागडे ने विश्वकर्मा को देवताओं के शिल्पकार बताते हुए कहा कि वह ब्रह्मांड के प्रथम इंजीनियर थे। उन्होंने एम. विश्वेश्वरैया को याद करते हुए उनके अभियांत्रिकी कौशल और समय पाबंदी से सीख लेने का आह्वान किया।

उद्योग एवं वाणिज्य, युवा मामले एवं खेल विभाग मंत्री कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने कहा कि जो कुछ विद्यार्थी सीखे उसका दायरा सीमित नहीं रखें। उन्होंने विद्यार्थियों को सृजनात्मक रहने, निरंतर दूसरों से सीखते हुए अपने कौशल से दुनिया को बदलने, विकसित किए जाने का आह्वान किया। उन्होंने पीयूष पांडे की चर्चा करते हुए कहा कि वह जीवन में जो देखते उसे याद रखते बेहतरीन रचते थे। उन्होंने युवाओं को अपने लक्ष्य उच्च रखने और हमेशा अपने आपको आगे रखने पर जोर देते हुए कहा कि रचनात्मकता की कोई सीमा नहीं है। दुनिया में क्या हो रहा है, इसकी जानकारी रखें और उसके अनुकूल अपने आपको ढालते हुए युवाओं को सफलता के मुकाम छूने का प्रयास करें।

विश्वकर्मा कौशल विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. देवस्वरूप ने सभी का स्वागत करते हुए विश्वविद्यालय द्वारा कौशल विकास के लिए किए जा रहे कार्यों के बारे में जानकारी दी। इससे पहले विश्वविद्यालय के बारे में फिल्म का भी प्रदर्शन किया गया। राज्यपाल ने इससे पहले विद्यार्थियों को डिग्री और पदक प्रदान किए।

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