नीट मामले में कोचिंग सेंटर का संस्थापक गिरफ्तार
नई दिल्ली, सोमवार, 18 मई 2026। केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा- स्नातक (नीट यूजी) प्रश्नपत्र लीक मामले में रेणुकाई करियर सेंटर (आरसीसी) के संस्थापक शिवराज रघुनाथ मोटेगांवकर को गिरफ्तार किया है। सीबीआई के अधिकारियों ने सोमवार को यह जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि रविवार को सीबीआई ने मोटेगांवकर के आवास की तलाशी ली थी और उस दौरान उसके मोबाइल फोन से मेडिकल प्रवेश परीक्षा का लीक हुआ प्रश्न पत्र मिला, इसके बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया। उन्होंने बताया कि मोटेगांवकर नीट यूजी प्रश्नपत्र को लीक करने और प्रसारित करने में शामिल संगठित गिरोह का सक्रिय सदस्य था।
सीबीआई ने गिरफ्तारी के अपने आधारों में कहा है कि अन्य आरोपियों के साथ, मोटेगांवकर को परीक्षा से दस दिन पहले 23 अप्रैल को प्रश्न पत्र और उत्तर प्राप्त हुए थे। उन्होंने बताया कि सीबीआई जब्त किए गए मोबाइल फोन को फॉरेंसिक विश्लेषण के लिए भेजेगी ताकि यदि कोई डेटा मिटाया गया हो तो उसे पुन: प्राप्त किया जा सके। सीबीआई का आरोप है कि मोटेगांवकर ने लीक हुए प्रश्न पत्रों और उत्तर पुस्तिकाओं की प्रतियां हस्तलिखित नोट्स के रूप में कई लोगों को उपलब्ध कराई थीं, जिन्हें परीक्षा होने के बाद नष्ट कर दिया गया था।
एजेंसी ने रविवार दोपहर लातूर के शिवनगर इलाके में स्थित कोचिंग सेंटर की तलाशी ली। शुक्रवार को मोटेगांवकर से उसी इलाके में उसके आवास पर करीब आठ घंटे तक पूछताछ की गई। सीबीआई ने इससे पहले रसायन विज्ञान के लेक्चरर पीवी कुलकर्णी और जीव विज्ञान की लेक्चरर मनीषा मंधारे को गिरफ्तार किया था, जो दोनों मनीषा वाघमारे नामक एक महिला के माध्यम से एक-दूसरे को जानते थे। मनीषा वाघमारे भी सीबीआई की हिरासत में है। आरोप है कि दोनों शिक्षकों ने वाघमारे को परीक्षा से पहले नीट उम्मीदवारों को विशेष सत्रों के लिए लाने के लिए राजी किया था।
अधिकारियों के अनुसार, छात्रों ने कथित तौर पर सत्रों में भाग लेने के लिए कई लाख रुपये दिए। इन सत्रों में उन्होंने प्रश्नों को नोटबुक में लिखा और ये प्रश्न बाद में वास्तविक प्रश्नपत्र से ''हूबहू मेल खाए।'' केंद्रीय एजेंसी ने प्राथमिकी दर्ज कर परीक्षा पत्र लीक होने के मामले की जांच के लिए टीमें गठित की हैं। यह परीक्षा बाद में रद्द कर दी गई थी। यह परीक्षा भारत के 551 शहरों और विदेशों में 14 केंद्रों पर आयोजित की गई थी। राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) द्वारा आयोजित इस परीक्षा के लिए लगभग 23 लाख उम्मीदवारों ने पंजीकरण कराया था। एनटीए के अनुसार, परीक्षा आयोजित होने के चार दिन बाद यानी सात मई की शाम को कथित कदाचार के संबंध में जानकारी प्राप्त हुई।
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