एनसीआर में एक अक्टूबर से 'पीयूसीसी नहीं, तो ईंधन नहीं' व्यवस्था लागू की जाएगी: मुख्य सचिव

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लखनऊ, बुधवार, 03 जून 2026। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में आगामी एक अक्टूबर से 'पीयूसीसी नहीं, तो ईंधन नहीं' व्यवस्था लागू की जाएगी। एनसीआर में प्रदूषण नियंत्रण और वायु गुणवत्ता में सुधार के मुद्दे पर मुख्य सचिव एसपी गोयल की अध्यक्षता में बुधवार को हुई उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में यह निर्देश दिया गया। उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से जारी बयान के मुताबिक, मुख्य सचिव ने बताया कि राज्य सरकार का लक्ष्य वर्ष 2026 के दौरान एनसीआर क्षेत्र में वायु प्रदूषण के स्तर में 30 से 35 फीसदी तक कमी लाना है।

गोयल ने बताया कि इस उद्देश्य की प्राप्ति के लिए वाहन प्रदूषण, औद्योगिक उत्सर्जन, धूल, निर्माण एवं विध्वंस अपशिष्ट (सी एंड डी वेस्ट), हरित आवरण विस्तार और पराली प्रबंधन जैसे प्रमुख क्षेत्रों में जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं। बयान के अनुसार, बैठक में अधिकारियों ने मुख्य सचिव को बताया कि एनसीआर के जिलों में लगभग 26.19 लाख 'एंड-ऑफ-लाइफ' (ईओएल) वाहनों (ऐसी गाड़ियां, जो इस्तेमाल के लिए निर्धारित समयसीमा से पुरानी हैं) की पहचान की गई है और जनवरी से अप्रैल 2026 के बीच 37,156 वाहनों को 'इस्तेमाल के योग्य नहीं' घोषित करते हुए 460 वाहनों को जब्त कर लिया गया।

बयान के मुताबिक, मुख्य सचिव ने निर्देश दिया कि आगामी एक अक्टूबर से 'पीयूसीसी नहीं, तो ईंधन नहीं' व्यवस्था लागू की जाएगी, जिसके तहत एनसीआर के 1,041 पेट्रोल पंप पर एएनपीआर कैमरे (ऑटोमैटिक नंबर प्लेट पहचान सुविधा वाले कैमरे) स्थापित किए जाएंगे।

प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (पीयूसीसी) एक आधिकारिक दस्तावेज है, जो यह प्रमाणित करता है कि वाहन से निकलने वाला धुआं सरकार की ओर से निर्धारित पर्यावरणीय मानकों के दायरे में है। यह प्रमाणपत्र भारत में सभी तरह के वाहनों (दोपहिया, तिपहिया, चार पहिया या वाणिज्यिक) के लिए अनिवार्य है। बयान के अनुसार, मुख्य सचिव ने बैठक में निर्देश दिए कि भविष्य में सभी प्रमुख गतिविधियों की डिजिटल निगरानी के लिए विभिन्न पोर्टल, मोबाइल एप्लीकेशन, जीपीएस ट्रैकिंग प्रणाली और डैशबोर्ड का एकीकृत नेटवर्क विकसित किया जाए, ताकि सड़क सफाई, सड़क पुनर्विकास, हरितीकरण, निर्माण अपशिष्ट प्रबंधन और अन्य प्रदूषण नियंत्रण उपायों की वास्तविक समय में निगरानी संभव हो सके।

बैठक में बताया गया कि वाहन क्षेत्र में 'नया सफर' योजना के माध्यम से पुराने और प्रदूषणकारी वाहनों को चरणबद्ध तरीके से हटाकर बीएस-6, सीएनजी एवं इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा दिया जा रहा है। बयान के मुताबिक, बैठक में अधिकारियों ने बताया कि सार्वजनिक परिवहन को स्वच्छ एवं पर्यावरण अनुकूल बनाने के लिए गाजियाबाद, नोएडा, ग्रेटर नोएडा और मेरठ में कुल 975 इलेक्ट्रिक बस के संचालन का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जबकि वर्तमान में इन शहरों में 100 ई-बस संचालित हैं। बैठक में बताया गया कि वायु गुणवत्ता की निगरानी को सुदृढ़ करने के लिए एनसीआर-उत्तर प्रदेश क्षेत्र में 18 नये सतत परिवेशी वायु गुणवत्ता निगरानी स्टेशन स्थापित किए जाने हैं।
 

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