फडणवीस से वार्ता के निमंत्रण के बाद राकांपा ने कृषि ऋण माफी को लेकर आंदोलन स्थगित किया

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छत्रपति संभाजीनगर, सोमवार, 29 जून 2026। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) ने महाराष्ट्र में बिना किसी शर्त के सभी किसानों के लिए कृषि ऋण माफी की मांग को लेकर छत्रपति संभाजीनगर में सोमवार को शुरू किया गया अपना आंदोलन स्थगित कर दिया। यह निर्णय राज्य के मंत्री गिरीश महाजन द्वारा पार्टी नेताओं को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के साथ वार्ता के लिए आमंत्रित किए जाने के बाद लिया गया। विधायक रोहित पवार के नेतृत्व में कैम्ब्रिज चौक पर शुरू हुआ यह प्रदर्शन लगभग एक घंटे तक चला। बाद में महाजन द्वारा मंगलवार को पूर्वाह्न साढ़े 11 बजे विधान भवन में मुख्यमंत्री के साथ बैठक कराने का आश्वासन दिए जाने के बाद आंदोलन स्थगित कर दिया गया।

इससे पहले दिन में रोहित पवार ने आरोप लगाया था कि सरकार उनके आंदोलन को दबाने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार की नई कृषि ऋण माफी योजना पर प्रस्तावित वार्ता नहीं हो सकी, जिसके बाद उन्हें यह प्रदर्शन शुरू करना पड़ा। पवार ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया, तो वह 'जेल भरो' आंदोलन शुरू करेंगे। इसी महीने की शुरुआत में विपक्षी दल के नेता रोहित पवार ने सोलापुर जिले के पंढरपुर में राज्य सरकार की 'पुण्यश्लोक अहिल्यादेवी होलकर शेतकरी कर्जमुक्ति योजना' में लागू ''कड़े'' प्रावधानों को हटाने की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की थी। बाद में सरकार की ओर से मुद्दों पर बैठक का आश्वासन मिलने के बाद उन्होंने अपना अनशन समाप्त कर दिया था।

पत्रकारों से बातचीत में रोहित पवार ने कहा, ''किसानों ने सड़क जाम की थी, लेकिन हम आम लोगों को अधिक देर तक असुविधा नहीं पहुंचाना चाहते थे। मंत्री गिरीश महाजन से बातचीत के बाद यह तय हुआ है कि हम मंगलवार को पूर्वाह्न साढ़े 11 बजे मुख्यमंत्री से मुलाकात करेंगे और विभिन्न मुद्दों पर चर्चा करेंगे।'' हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इस बैठक में कोई ठोस परिणाम नहीं निकला, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

उन्होंने कहा, ''दुर्भाग्य से, यह जिम्मेदारी फिर से महाजन पर आ गई है, जिन्होंने पहले पंढरपुर आंदोलन के दौरान हमें आश्वासन दिया था। उन्होंने फिर से मुख्यमंत्री से बात की है और हमें बैठक के लिए बुलाया है। हम किसान नेताओं के साथ सरकार से मिलेंगे और देखेंगे कि वह क्या कहती है।''

गौरतलब है कि दो जून को महाराष्ट्र मंत्रिमंडल ने 36,585 करोड़ रुपये की कृषि ऋण माफी योजना को मंजूरी दी थी, जिससे लगभग 56 लाख किसानों को लाभ मिलने की उम्मीद है। रोहित पवार किसानों के लिए संपूर्ण ऋण माफी की मांग कर रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी, ''यदि सरकार किसानों के लिए कुछ नहीं करती है, तो हमारे पास सड़कों पर लौटने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा। अगर कल की बैठक से कोई परिणाम नहीं निकलता, तो हम विदर्भ में आंदोलन शुरू करेंगे।'' इस बीच, राकांपा (शरदचंद्र पवार) की कार्यकारी अध्यक्ष एवं लोकसभा सदस्य सुप्रिया सुले भी इस प्रदर्शन में शामिल हुईं, जिन्हें बाद में पुलिस ने हिरासत में ले लिया।

हिरासत में लिए जाने से पहले सुले ने कहा कि पार्टी के विधायक विधानसभा में किसानों से जुड़े मुद्दे उठाएंगे और यदि न्याय नहीं मिला तो पार्टी विधान भवन तक मार्च करेगी। उन्होंने महायुति सरकार पर 'लाडकी बहिन योजना' के क्रियान्वयन को लेकर भी आलोचना की और आरोप लगाया कि करीब 80 लाख लाभार्थियों को केवाईसी प्रक्रिया पूरी नहीं कर पाने के कारण योजना का लाभ नहीं मिल पाया। उन्होंने कहा, ''अगर सरकार केवाईसी प्रक्रिया पूरी नहीं कर सकती, तो उसे यह जिम्मेदारी हमें दे दे। हम इसे पूरा कर देंगे। किसानों को कर्जमाफी नहीं मिल रही है, सिंचाई की समस्याएं बनी हुई हैं और पेपर लीक की घटनाएं जारी हैं।''

सुले ने कहा कि राकांपा (शरदचंद्र पवार) तब तक अपना आंदोलन जारी रखेगा जब तक किसानों को बिना किसी शर्त के कृषि ऋण माफी नहीं मिल जाती, जैसा कि पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार के दौरान लागू किया गया था। 'पुण्यश्लोक अहिल्यादेवी होलकर शेतकरी कर्जमुक्ति योजना' के तहत किसानों को अधिकतम दो लाख रुपये तक की कृषि ऋण माफी का प्रावधान है। योजना के तीन घटक हैं- ऋण माफी, एकमुश्त समझौता और प्रोत्साहन लाभ। पात्रता के लिए भूमि स्वामित्व की कोई सीमा निर्धारित नहीं की गई है।

योजना के ऋण माफी घटक के तहत जिन किसानों पर मूलधन और ब्याज सहित अल्पकालिक फसल ऋण की कुल बकाया राशि दो लाख रुपये तक है, उन्हें पूरा कर्ज माफ किया जाएगा। इसके लिए ऋण एक अप्रैल 2019 से 31 मार्च 2025 के बीच वितरित हुआ होना चाहिए, 30 सितंबर 2025 तक बकाया होना चाहिए और 31 मार्च 2026 तक उसका भुगतान नहीं किया गया होना चाहिए। जिन किसानों पर दो लाख रुपये से अधिक का बकाया है, उन्हें एकमुश्त समझौता (ओटीएस) के दायरे में रखा जाएगा। ऐसे किसानों को पहले दो लाख रुपये से अधिक की राशि स्वयं जमा करनी होगी, जिसके बाद वे दो लाख रुपये तक की ऋण माफी के पात्र होंगे। इसके लिए उन्हें 31 मार्च 2027 तक अपनी हिस्सेदारी की बकाया राशि जमा करने का समय दिया गया है।
 

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