स्वर्ण मंदिर में श्रद्धालुओं से मुख्यमंत्री मान की तस्वीर वाले पहचान पत्र हटाने को कहा गया

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अमृतसर, रविवार, 05 जुलाई 2026। राज्य सरकार की 'मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा योजना' के तहत स्वर्ण मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं से कहा गया कि वे उन पहचान-पत्रों को हटा दें जिन पर मुख्यमंत्री भगवंत मान की तस्वीरें हैं। एसजीपीसी के एक अधिकारी ने यह जानकारी दी। शनिवार को एसजीपीसी कार्य बल ने मंदिर के संगमरमर परिसर में मौजूद श्रद्धालुओं से कहा कि वे गर्भगृह में प्रवेश करने से पहले मान की तस्वीर वाला पहचान-पत्र हटा दें। पिछले महीने, सिखों के धार्मिक नेताओं ने एक आपत्तिजनक वीडियो को लेकर मुख्यमंत्री मान को 'गुरु दोखी' (गुरु-विरोधी) और 'खालसा पंथ विरोधी' घोषित किया था। सिखों की सर्वोच्च धार्मिक संस्था, अकाल तख्त ने इस वीडियो के कारण मान को 'गुरु दोखी' और 'खालसा पंथ विरोधी' करार दिया।

हालांकि, मान ने दावा किया कि वीडियो में वह नहीं थे और क्लिप में दिख रहे व्यक्ति ने उनके चेहरे जैसा दिखने वाला मुखौटा पहना हुआ था। एसजीपीसी के एक पदाधिकारी ने कहा कि गुरुद्वारे में ऐसे पहचान पत्र पहनने का कोई मतलब नहीं है, क्योंकि वहां किसी भी तरह के प्रचार की इजाजत नहीं है। सोशल मीडिया पर एक वीडियो भी वायरल हुआ जिसमें एसजीपीसी कार्य बल ने कई तीर्थयात्रियों से पहचान पत्र हटाने को कहा। मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा योजना के तहत पंजाब के 50 साल से अधिक आयु के निवासी मुफ्त में धार्मिक स्थलों की यात्रा कर सकते हैं।

इससे पहले, एक कथित आपत्तिजनक वीडियो को लेकर राजनीतिक विवाद शुरू हो गया था और अकाल तख्त ने 15 जून को मुख्यमंत्री मान के खिलाफ एक आदेश जारी किया था। यह आदेश तब आया जब अकाल तख्त ने दावा किया कि दो फॉरेंसिक प्रयोगशालाओं ने उस वीडियो को "असली" पाया है, जिसमें मान जैसा एक व्यक्ति दिखायी दे रहा है। यह मामला इस वर्ष जनवरी में उस समय शुरू हुआ था, जब अकाल तख्त ने मुख्यमंत्री भगवंत मान को तलब किया था। उन पर आरोप था कि उन्होंने 'गुरु की गोलक' (गुरुद्वारे के दानपात्र) को लेकर टिप्पणी की थी और एक कथित वीडियो क्लिप में सिख गुरुओं तथा चरमपंथी जरनैल सिंह भिंडरांवाले की तस्वीरों के साथ 'आपत्तिजनक गतिविधियां' की थीं।

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