दिल्ली की अदालत ने पीएफआई अध्यक्ष अबूबकर की जमानत याचिका खारिज की

img

नई दिल्ली, गुरुवार, 16 जुलाई 2026। दिल्ली की एक अदालत ने पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) के संस्थापक अध्यक्ष ई. अबूबकर की जमानत याचिका खारिज कर दी। उसे भारत सरकार को उखाड़ फेंकने और 2047 तक इस्लामी खिलाफत स्थापित करने की साजिश में संलिप्तता के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। विशेष एनआईए न्यायाधीश प्रशांत शर्मा आरोपी की नियमित जमानत याचिका पर सुनवाई कर रहे थे। याचिका में कहा गया कि अबूबकर की स्वास्थ्य स्थिति लगातार बिगड़ रही है और उसके खिलाफ कोई ठोस मामला नहीं है। अदालत ने 15 जुलाई के अपने आदेश में कहा, ''उपरोक्त तथ्यों, परिस्थितियों और उपलब्ध सामग्री के मद्देनजर मुझे याचिकाकर्ता को जमानत देने का कोई आधार नहीं मिलता। इसलिए याचिकाकर्ता या आरोपी ई. अबूबकर की वर्तमान जमानत याचिका खारिज की जाती है।'' अबूबकर के वकील ने अदालत को बताया कि उनके मुवक्किल के खिलाफ़ आरोप तय किए जा चुके हैं और उसकी सेहत भी बिगड़ रही है। उन्होंने कहा कि इस मामले की न्यायिक कार्यवाही में देरी हुई है।

अदालत ने कहा, ''इन परिस्थितियों में अपराध की गंभीरता, इस अदालत पर कार्यभार, मामले में आरोपियों की बड़ी संख्या और उनकी ओर से पैरवी कर रहे वकीलों की संख्या जैसे पहलू भी शामिल हैं।'' न्यायाधीश ने कहा कि आरोपी के वकील ने न्यायिक कार्यवाही में देरी के कारणों का स्पष्ट रूप से उल्लेख नहीं किया। अदालत ने कहा, ''जिस अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया गया है, वहां मामले के लंबित रहने, सुनवाई में देरी के कारणों और अन्य प्रशासनिक पहलुओं का आरोपी के वकील ने कोई उल्लेख नहीं किया। इसलिए मुकदमे में देरी का तर्क आधारहीन है और इसे खारिज किया जाता है।'' 

जमानत याचिका का विरोध करते हुए राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) के वकील राहुल त्यागी ने अदालत से कहा कि पर्याप्त साक्ष्यों के आधार पर आरोपी के खिलाफ आरोप तय किए जा चुके हैं और जेल में उसे समुचित चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। अदालत ने उच्च न्यायालय द्वारा आरोपी की जमानत याचिका पहले ही खारिज किए जाने के आदेश का भी संज्ञान लिया और कहा कि तब से परिस्थितियों में कोई बदलाव नहीं आया है। न्यायाधीश ने कहा कि पर्याप्त साक्ष्यों के आधार पर आरोपी के खिलाफ आरोप तय किए जा चुके हैं, इसलिए उसे जमानत नहीं दी जा सकती। पिछले महीने दिल्ली की एक अदालत ने प्रतिबंधित संगठन पीएफआई के कई शीर्ष नेताओं के खिलाफ आरोप तय करने का आदेश दिया था। अदालत ने कहा था कि भारत सरकार को उखाड़ फेंकने और वर्ष 2047 तक इस्लामिक खिलाफत स्थापित करने की साजिश की ''गंभीर आशंका'' दिखाई देती है।

Similar Post

LIFESTYLE

AUTOMOBILES

Recent Articles

Facebook Like

Subscribe

FLICKER IMAGES

Advertisement