राहुल गांधी की हिरासत लोकतांत्रिक मूल्यों पर हमला : गोवा कांग्रेस

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पणजी, बुधवार, 22 जुलाई 2026। गोवा में कांग्रेस नेताओं ने बुधवार को राहुल गांधी को हिरासत में लिए जाने की निंदा करते हुए इसे "लोकतांत्रिक मूल्यों पर हमला" बताया और प्रदर्शन कर रहे छात्रों के खिलाफ कथित कार्रवाई के लिए जिम्मेदार लोगों पर कदम उठाने की मांग को लेकर राज्यपाल पी. अशोक गणपति राजू को ज्ञापन सौंपा। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाद्रा और समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव को मंगलवार को दिल्ली में प्रधानमंत्री आवास के बाहर धरना देने के बाद पुलिस ने जबरन हटा दिया। वे प्रधानमंत्री के इस्तीफे की मांग कर रहे थे। कुछ घंटे बाद उन्हें रिहा कर दिया गया।

गोवा प्रदेश कांग्रेस कमेटी (जीपीसीसी) के अध्यक्ष गिरीश चोडणकर के नेतृत्व में पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने बुधवार को लोक भवन में राज्यपाल से मुलाकात की और उन्हें ज्ञापन सौंपा। प्रतिनिधिमंडल में कार्यकारी अध्यक्ष एम. के. शेख, कार्लोस अल्वारेस फेरेरा और सुनील कावथंकर तथा प्रदेश युवा कांग्रेस अध्यक्ष अर्चित नाइक शामिल थे। उन्होंने आरोप लगाया कि शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर केंद्र सरकार के रुख के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे छात्रों के साथ एकजुटता जताते हुए शांतिपूर्ण तरीके से विरोध कर रहे राहुल गांधी को हिरासत में लिया गया। ज्ञापन में राहुल गांधी की हिरासत को "लोकतांत्रिक मूल्यों, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और विपक्ष की संवैधानिक भूमिका पर हमला" बताया गया।

पार्टी ने 20 जुलाई को प्रदर्शन कर रहे छात्रों के खिलाफ कथित रूप से बल प्रयोग का भी जिक्र किया और कहा कि इस घटना ने देश की अंतरात्मा को झकझोर दिया है। जीपीसीसी ने राज्यपाल से अपने मांग पत्र को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और केंद्र सरकार को भेजने का आग्रह किया। कांग्रेस ने अपनी मांगों में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग भी की। पार्टी ने आरोप लगाया कि वह छात्रों के हितों की रक्षा करने और शिक्षा तथा परीक्षा प्रणाली से जुड़े मुद्दों का समाधान करने में विफल रहे हैं।

पार्टी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के इस्तीफे की भी मांग की। कांग्रेस ने उन्हें उस कानून-व्यवस्था तंत्र के लिए जिम्मेदार ठहराया, जिसने "लोकतांत्रिक नेताओं को हिरासत में लिया और शांतिपूर्ण छात्र प्रदर्शनों को दबाया।" ज्ञापन में छात्रों के खिलाफ कथित बल प्रयोग की निष्पक्ष जांच कराने, शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल छात्रों के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों को वापस लेने तथा इस मुद्दे पर संसद के दोनों सदनों में चर्चा कराने की मांग की गई।

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