संसद की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित, मानसून सत्र का अधिकांश समय चढ़ा हंगामे की भेंट

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नई दिल्ली, गुरुवार, 13 अगस्त 2026। राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) के पेपर लीक, विद्यार्थियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई की जवाबदेही तय करने और अयोध्या में राममंदिर के चढ़ावा चोरी की जांच की मांग को लेकर अधिकांश समय विपक्ष के हंगामे और शोरगुल की भेंट चढ़े संसद के मानसून सत्र के आखिरी दिन गुरुवार को दोनों सदनों की कार्यवाही अनिश्चितकालीन के लिए स्थगित कर दी गयी। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने विपक्ष के लगातार हंगामे के बीच सदन की कार्यवाही गुरुवार को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी। श्री बिरला ने जैसे ही सदन की कार्यवाही शुरू की तो विपक्षी सदस्यों ने हंगामा शुरू कर दिया। श्री बिरला ने वंदे मातरम् के गायन के लिए सदस्यों से खड़े होने का आग्रह किया। राष्ट्रगीत के बाद उन्होंने सदन की कार्यवाही अनिश्चितकाल तक स्थगित कर दी। इसके साथ ही 20 जुलाई से शुरू हुआ संसद का मानसून सत्र समाप्त हो गया।

इस दौरान सदन में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृहमंत्री अमित शाह, विपक्ष के नेता राहुल गांधी सहित सभी दलों के प्रमुख नेता मौजूद थे। राज्य सभा में विपक्ष के शोर-शराबे और हंगामे के बीच खान एवं खनिज विकास संशोधन विधेयक 2026 को पारित करने के साथ सदन को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया। इस विधेयक को हंगामे के बीच ही पूर्वाह्न में शून्यकाल की जगह चर्चा और पारित करने के लिए रखा गया। खान मंत्री जी किशन रेड्डी द्वारा चर्चा के उत्तर के बाद सदन में विपक्षी सदस्यों के सभी संशोधनों को ध्वनि मत से खारिज करते हुए विधेयक को पारित किया। सभापति सी पी राधाकृष्णन ने अपने संबोधन में राज्य सभा के मानसून सत्र को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करने की घोषणा करते हुए सत्र के दौरान हुए व्यवधानों को गहरी चिंता का विषय बताया। उन्होंने कहा कि इस सत्र के दौरान लगातार अव्यवस्था बनी रही जो 'गहरी चिंता का विषय है।'

सत्र के दौरान सदन में शोर-शराबे और हंगामे के बीच राष्ट्रीय महत्व के 12 विधेयक पारित किये गये या उन्हें पारित कर लोकसभा को लौटाया गया।  सभापति ने कहा, "हमने मानसून सत्र के समय का पूरा उपयोग नहीं किया। उन्होंने कहा कि सदन की मर्यादाओं की रक्षा करना हमारी जिम्मेदारी है, क्योंकि अनुशासन और मर्यादाओं के अनुपालन से ही इस महान संस्था के प्रति लोगों का विश्वास मजबूत होता है। उन्होंने उम्मीद जतायी कि आने वाले सत्र में सदस्य इसका ध्यान रखेंगे और सदन की मर्यादा रखी जाएगी, ताकि देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था को और बल मिल सके। सभापति के विदाई संबोधन के बाद वंदे मातरम् का गायन हुआ और कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गयी।

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