कोलकाता दुर्गा पूजा में बंगाल की सांस्कृतिक विरासत की झलक दिखेगी

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कोलकाता, मंगलवार, 06 अक्टूबर 2026। दक्षिण कोलकाता की 84 साल पुरानी हाजरा पार्क दुर्गोत्सव समिति इस साल ‘चिरायित - द रूट्स ऑफ बंगाल: रूटेड इन द पास्ट, इनफाइनाइट इन कॉन्शसनेस’ थीम के जरिये पश्चिम बंगाल की सांस्कृतिक विरासत और कलात्मक परंपराओं को प्रदर्शित करेगी। आयोजकों ने मंगलवार को यह जानकारी दी।

आयोजकों की ओर से सायनदेब चटर्जी ने कहा कि इस दुर्गोत्सव में दुर्गा पूजा को केवल धार्मिक उत्सव के रूप में नहीं, बल्कि बंगाल की सांस्कृतिक स्मृतियों की यात्रा के रूप में प्रस्तुत किया जाएगा, जिसमें परंपराओं, शिल्पकला, लोक प्रथाओं और कलात्मक अभिव्यक्तियों को एक साथ दिखाया जाएगा। ‘चिरायित’ का अर्थ शाश्वत या कालातीत है। यह थीम इस विचार को दर्शाती है कि कलात्मक रूप और अभिव्यक्तियां भले बदलती रहें, लेकिन बंगाल की सांस्कृतिक चेतना और परंपराएं कायम रहती हैं। चटर्जी ने कहा कि प्रतिष्ठानों और विषय आधारित प्रस्तुतियों के जरिये दर्शकों को बंगाल की जड़ों से परिचित कराया जाएगा और समकालीन कारीगरों की रचनात्मकता को भी सामने लाया जाएगा।

उन्होंने कहा कि यह थीम भूमि, लोगों और उनकी कलात्मक परंपराओं के बीच स्थायी संबंध को रेखांकित करती है और बंगाल की सांस्कृतिक पहचान को लगातार विकसित होती परंपरा के रूप में प्रस्तुत करती है।उन्होंने बताया कि समिति वर्षों से अपने दुर्गोत्सव प्रतिष्ठानों के माध्यम से विभिन्न विषयों को नए कलात्मक अंदाज में पेश करती रही है। इस वर्ष भी भक्ति के साथ सांस्कृतिक कहानी को जोड़ा जाएगा और बंगाल की सांस्कृतिक पहचान को आकार देने वाली कलात्मक परंपराओं तथा कारीगरों के कौशल को प्रदर्शित किया जाएगा।

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