युद्ध की बदलती प्रकृति को भांपने वालों को मिलती है जीत: वायुसेना प्रमुख

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नई दिल्ली, शुक्रवार, 09 अक्टूबर 2026। वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल ए पी सिंह ने शुक्रवार को कहा कि जीत उन्हीं को मिलती है जो युद्ध की प्रकृति में होने वाले बदलावों को भांप कर उसके अनुरूप खुद को ढाल लेते हैं। यहां ‘बदलते युद्धक्षेत्र में हवाई शक्ति की केंद्रीय भूमिका’ विषय पर आयोजित एक संगोष्ठी को संबोधित करते हुए उन्होंने दोहराया कि दुनिया में जारी दो बड़े संघर्षों और पिछले साल ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान भारत के अपने अनुभव ने वायु शक्ति की सर्वोच्च भूमिका को रेखांकित किया है।

यहां सुब्रतो पार्क में एक रक्षा थिंक टैंक की ओर से आयोजित यह कार्यक्रम राजस्थान के जोधपुर वायुसेना स्टेशन पर जारी बड़े बहुपक्षीय हवाई अभ्यास ‘तरंग शक्ति’ के इतर दिल्ली में आयोजित एक समानांतर कार्यक्रम है। भारतीय वायुसेना की मेजबानी में हो रहे इस अभ्यास के दूसरे संस्करण में अमेरिका, फ्रांस, जर्मनी और ऑस्ट्रेलिया सहित सात विदेशी देश अपने हवाई संसाधनों के साथ हिस्सा ले रहे हैं। अमेरिका का बहुउद्देशीय स्टील्थ लड़ाकू विमान एफ-35 पहली बार इस अभ्यास में हिस्सा ले रहा है। वायुसेना सभागार में आयोजित संगोष्ठी में वायुसेना प्रमुख ने कहा कि जीत उन्हीं को मिलती है जो युद्ध की प्रकृति में होने वाले बदलावों का पहले से अनुमान लगाते हैं।

उन्होंने कहा कि अगर कोई बदलावों का अनुमान नहीं लगाता और उनके होने का इंतजार करने के बाद खुद को उनके अनुरूप ढालता है, तो तेजी से विकसित होती प्रौद्योगिकी और युद्ध की बदलती प्रकृति के इस दौर में शायद तब तक काफी देर हो चुकी होगी। बृहस्पतिवार को एयर चीफ मार्शल सिंह ने उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद स्थित हिंडन वायुसेना अड्डे पर भव्य समारोह के साथ वायुसेना की 94वीं वर्षगांठ के आयोजन का नेतृत्व किया। इससे पहले, वायुसेना दिवस पर अपने संबोधन में उन्होंने कहा था कि दुनिया के कई हिस्सों में जारी संघर्षों ने दिखाया है कि राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए वायु शक्ति प्रमुख साधन है।

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