यमुना डूब क्षेत्र में बैरकों के निर्माण की दिल्ली पुलिस की याचिका खारिज
नई दिल्ली, मंगलवार, 02 जनवरी 2024। उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को दिल्ली पुलिस की उस याचिका को खारिज कर दिया जिसमें उसने यमुना नदी के बाढ़ क्षेत्र में अपने प्रशिक्षुओं के रहने के लिए बैरक बनाने की अनुमति मांगी थी। न्यायमूर्ति अभय एस ओका और न्यायमूर्ति उज्जल भुइयां की पीठ ने आश्चर्य जताया कि डूब क्षेत्र के मैदानी इलाकों में निर्माण की अनुमति कैसे दी जा सकती है।
पीठ ने कहा, ‘‘आप यमुना के डूब क्षेत्र में निर्माण क्यों करना चाहते हैं? पर्यावरण के लिए कदम उठाने की जरूरत है। पिछले साल बाढ़ का पानी उच्चतम न्यायालय में घुस गया था। हम यमुना पर बैरक की अनुमति कैसे दे सकते हैं? खारिज।’’ शीर्ष अदालत राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) के एक आदेश के खिलाफ दिल्ली पुलिस की याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसने 2020 में याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि परियोजना डूब क्षेत्र के मैदानी इलाके में स्थित है और इसलिए इसकी अनुमति नहीं दी जा सकती । एनजीटी ने दिल्ली पुलिस की इस दलील से सहमत होने से इनकार कर दिया था कि यमुना पुनर्जीवन की निगरानी के लिए गठित प्रधान समिति ने दिल्ली पुलिस के पक्ष में सिफारिशें की थीं।
प्राधिकरण ने अपने 2015 के आदेश में सीमांकित बाढ़ क्षेत्र में किसी भी निर्माण गतिविधि पर रोक लगा दी थी और प्रधान समिति को आज की सभी मौजूदा संरचनाओं की पहचान करने का निर्देश दिया था जो सीमांकित बाढ़ क्षेत्र में आती हैं। एनजीटी ने कहा था, ‘‘पहचान होने पर, प्रधान समिति अपनी सिफारिशें देगी कि पर्यावरण और पारिस्थितिकी के हित में कौन सी संरचनाओं को ध्वस्त किया जाना चाहिए या नहीं, खासकर, यदि ऐसी संरचनाएं जो अनधिकृत और अवैध तरीके से बनाई गई हैं।’’
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