स्टालिन ने 2025 वक्फ अधिनियम के प्रावधानों पर रोक वाले न्यायालय के आदेश का स्वागत किया
चेन्नई, सोमवार, 15 सितंबर 2025। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम के स्टालिन ने सोमवार को 2025 के वक्फ अधिनियम के प्रमुख प्रावधानों पर रोक लगाने वाले उच्चतम न्यायालय के अंतरिम आदेश का स्वागत करते हुए कहा कि यह ‘‘भाजपा सरकार द्वारा किए गए असंवैधानिक और अवैध संशोधनों को रद्द करने’’ की दिशा में एक बड़ा कदम है। उच्चतम न्यायालय ने वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 के कई प्रमुख प्रावधानों पर रोक लगा दी, जिसमें यह प्रावधान भी शामिल है कि केवल पिछले कम से कम पांच वर्षों से इस्लाम का पालन करने वाले लोग ही संपत्ति को वक्फ के रूप में समर्पित कर सकते हैं। इसने पूरे कानून पर रोक लगाने से इनकार कर दिया।
प्रधान न्यायाधीश बी आर गवई और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने वक्फ संपत्तियों की स्थिति पर निर्णय करने के लिए जिला कलेक्टर को दी गई शक्तियों पर भी रोक लगा दी और वक्फ बोर्डों में गैर-मुस्लिम भागीदारी के विवादास्पद मुद्दे पर फैसला सुनाते हुए निर्देश दिया कि केंद्रीय वक्फ परिषद में 20 में से चार से अधिक गैर-मुस्लिम सदस्य नहीं होने चाहिए, और राज्य वक्फ बोर्डों में 11 में से तीन से अधिक गैर-मुस्लिम सदस्य नहीं होने चाहिए।
द्रमुक अध्यक्ष स्टालिन ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘संसद में विधेयक पेश होने के समय से ही द्रमुक इन संशोधनों का लगातार विरोध करती रही है। इसके अधिनियम बनने के बाद, द्रमुक ने इसे उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी और अन्य पक्षों के साथ मिलकर इसमें सफलता प्राप्त की।’’ उन्होंने कहा, ‘‘आज का आदेश मुस्लिम अल्पसंख्यक समुदाय के धार्मिक अधिकारों की रक्षा और संविधान को कायम रखने के लिए माननीय उच्चतम न्यायालय में लोगों की आशा और विश्वास को मजबूत करता है।’’
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