ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पुलिस ने अन्य सुरक्षा बलों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम किया: बीएसएफ प्रमुख
हैदराबाद, शुक्रवार, 17 अक्टूबर 2025। सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के महानिदेशक दलजीत सिंह चौधरी ने शुक्रवार को कहा कि पुलिस ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान अन्य सुरक्षा बलों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम किया। चौधरी ने यहां सरदार वल्लभभाई पटेल राष्ट्रीय पुलिस अकादमी (एसवीपीएनपीए) में भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के 77वें (नियमित भर्ती) बैच के परिवीक्षार्थियों की ‘पासिंग आउट परेड’ के निरीक्षण के बाद कहा, ‘‘हमने ‘सिंदूर’ जैसे अभियानों में देखा कि पुलिस ने सशस्त्र बलों और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम किया।’’
उन्होंने कहा कि ऐसा समन्वय याद दिलाता है कि राष्ट्र की सुरक्षा किसी एक संस्था का काम नहीं, बल्कि एक सामूहिक प्रयास है। चौधरी ने कहा कि ऐसे क्षणों में अक्सर भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारी राज्य की ताकत को लोगों के विश्वास से जोड़ने वाले सेतु का काम करते हैं और वे यह सुनिश्चित करते हैं कि लोकतंत्र अपनी सबसे कठिन परीक्षाओं में भी सफल रहे।
बीएसएफ महानिदेशक ने कहा कि अपराध की रोकथाम और जांच से लेकर आतंकवाद का मुकाबला करने, नशीले पदार्थों और तस्करी से निपटने से लेकर जैव विविधता की रक्षा करने और सामाजिक-आर्थिक कानूनों को लागू करने तक आईपीएस का कार्यक्षेत्र बहुत व्यापक और विस्तृत होता है। उन्होंने अपने अधिकारियों से सर्वोच्च स्तर की सत्यनिष्ठा बनाए रखने, मानवाधिकारों का सम्मान करने और जनता की सेवा के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध रहने का आह्वान किया।
चौधरी ने कहा, ‘‘आप (आईपीएस अधिकारी) ऐसे समय में सेवा में कदम रख रहे हैं जब भारत परिवर्तनकारी बदलावों के दौर से गुजर रहा है। आपके सामने चुनौतियां आसान नहीं हैं। आतंकवाद, वामपंथी उग्रवाद (एलडब्ल्यूई) और हिंसक अलगाववाद अब भी हमारी आंतरिक सुरक्षा के लिए खतरा बने हुए हैं जबकि साइबर अपराध, वित्तीय धोखाधड़ी, कट्टरपंथ और सूचना युद्ध (अपने विरोधी पर प्रतिस्पर्धात्मक लाभ प्राप्त करने के लिये सूचना का प्रबंधन) जैसे नए खतरे भी सामने आ रहे हैं।’’
उन्होंने अधिकारियों से कहा कि लोकतंत्र के संरक्षक के रूप में आपको लड़ने के साहस, घाव भरने की करुणा और न्याय की अटूट भावना के साथ आगे बढ़कर नेतृत्व करना चाहिए तथा कमजोर और शक्तिशाली दोनों के साथ बिना किसी भेदभाव के समान व्यवहार करना चाहिए। चौधरी ने कहा कि पुलिस की कार्यप्रणाली को स्मार्ट, सख्त और संवेदनशील, आधुनिक और गतिशील, सतर्क और जवाबदेह, विश्वसनीय और उत्तरदायी, तकनीकी रूप से दक्ष और अच्छी तरह प्रशिक्षित होना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘‘आपको उदाहरण पेश करना होगा।’’ उन्होंने कहा कि प्रौद्योगिकी ताकत को बढ़ाएगी, लेकिन केवल प्रौद्योगिकी से विश्वास नहीं जीता जा सकता।
चौधरी ने कहा कि विश्वास करुणा, सुलभता और जिन लोगों की आप सेवा करते हैं, उनकी बात सुनने की तत्परता से अर्जित किया जाता है। उन्होंने कहा, ‘‘याद रखें कि पुलिस थाना आम नागरिकों के लिए संपर्क का पहला बिंदु होता है और इसकी कार्यप्रणाली किसी भी अन्य चीज से अधिक आपके नेतृत्व को प्रतिबिंबित करेगी। जमीनी स्तर पर इस संपर्क को मजबूत करना ही सेवा की सच्ची विश्वसनीयता निर्धारित करेगा।’’ समारोह में कुल 190 प्रशिक्षु अधिकारियों ने भाग लिया जिनमें 174 आईपीएस प्रशिक्षु और नेपाल, भूटान एवं मालदीव के 16 विदेशी अधिकारी शामिल थे। एसवीपीएनपीए के निदेशक अमित गर्ग ने भी कार्यक्रम को संबोधित किया।
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