हरियाणा विधानसभा का बजट सत्र शुक्रवार से होगा शुरू

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चंडीगढ़, गुरुवार, 19 फरवरी 2026। हरियाणा विधानसभा का बजट सत्र शुक्रवार को शुरू होगा। सत्र के हंगामेदार होने के आसार है क्योंकि कानून और व्यवस्था सहित कई मुद्दों पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार को घेरने के लिए विपक्ष ने रणनीति तैयार की है। सत्र की शुरुआत राज्यपाल के संबोधन से होगी। हरियाणा का वित्त विभाग स्वयं मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी संभाल रहे हैं। उन्होंने राज्य का वित्तवर्ष 2026-27 के लिए बजट पेश करने से पहले विभिन्न वर्गों से परामर्श किया और उनसे सुझाव लिये। सैनी ने सत्तारूढ़ और विपक्षी विधायकों से भी सुझाव मांगे।

सैनी ने मंगलवार को कहा कि भाजपा सरकार का बजट जनता का बजट होगा क्योंकि यह उनकी आकांक्षाओं और अपेक्षाओं को पूरा करेगा। उन्होंने हरियाणा की आर्थिक स्थिति का जिक्र करते हुए कहा था कि योजना विभाग द्वारा 29 जनवरी को जारी आंकड़ों के अनुसार, राज्य का सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) 2025-26 (अग्रिम अनुमान) 13,67,769 करोड़ रुपये रहा, जबकि 2024-25 में यह 12,13,951 करोड़ रुपये था। इस प्रकार राज्य की जीडीपी में 12.67 प्रतिशत की वृद्धि की उम्मीद है। हरियाणा विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस विधायक भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने आरोप लगाया है कि राज्य में कानून व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई है और हर कोई असुरक्षित महसूस कर रहा है।

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा था कि बजट सत्र में कांग्रेस कानून-व्यवस्था जैसे विभिन्न मुद्दों को मजबूती से उठाएगी और सरकार से जवाब मांगेगी। हुड्डा ने कहा, '' आज राज्य में व्यापारियों से लेकर चिकित्सकों तक, हर कोई जबरन वसूली से त्रस्त है। उद्योग पलायन कर रहे हैं और निवेश घट रहा है। कानून व्यवस्था में सुधार और जनता का विश्वास जगाना प्रगति के लिए आवश्यक है।'' उन्होंने कहा, ' भाजपा शासन के तहत कानून और व्यवस्था की स्थिति बिगड़ गई है और लोगों में भय का माहौल है।"

हुड्डा ने हाल ही में हुए भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को ''किसान विरोधी'' भी करार दिया। इससे पहले सैनी ने कहा था कि विपक्ष के पास उठाने के लिए कोई वास्तविक मुद्दे नहीं हैं और उसने ''झूठ की दुकान'' खोल दी है। इंडियन नेशनल लोक दल ने विभिन्न महत्वपूर्ण मुद्दों पर 11 ध्यानाकर्षण नोटिस प्रस्तुत किए हैं, जिनमें सतलुज-यमुना लिंक (एसवाईएल) नहर के निर्माण के लिए उच्चतम न्यायालय के आदेश पर ''कार्रवाई की कमी'', ''बिगड़ती'' कानून व्यवस्था की स्थिति, सरकारी विद्यालयों में हजारों रिक्त शिक्षण पद, मादक पदार्थों का दुरुपयोग और विश्वविद्यालयों में शैक्षणिक और गैर-शिक्षण कर्मचारियों की कमी शामिल है।
 

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