उत्तर प्रदेश कैबिनेट ने मुख्यमंत्री ग्राम परिवहन योजना-2026 को मंजूरी दी

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लखनऊ, मंगलवार, 10 मार्च 2026। उत्तर प्रदेश मंत्रिमंडल ने मंगलवार को 'मुख्यमंत्री ग्राम परिवहन योजना-2026' को मंजूरी दे दी, जिसके तहत राज्य के हर गांव तक बसों की आवाजाही सुनिश्चित करने का प्रयास किया जाएगा। लोकभवन में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में वित्त और संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में कुल 31 प्रस्ताव पेश किए गए, जिनमें से 30 को मंजूरी दे दी गई। संवाददाता सम्मेलन में मौजूद परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने मुख्यमंत्री ग्राम परिवहन योजना-2026 के बारे में विस्तृत जानकारी दी।

एक बयान के अनुसार उन्होंने बताया, ''अभी तक 12,200 गांवों तक बसें नहीं पहुंच रही थीं, लेकिन नयी नीति के तहत उत्तर प्रदेश की सभी 59,163 ग्राम सभाओं तक बसें पहुंचेंगी। इन बसों को परमिट व टैक्स से मुक्त रखा गया है। इससे प्रदेश की बड़ी ग्रामीण आबादी लाभान्वित होगी।'' उन्होंने कहा कि जिलाधिकारी की अध्यक्षता में कमेटी गठित की जाएगी, जिसमें मुख्य विकास अधिकारी, पुलिस अधीक्षक, सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी सदस्य होंगे। उन्होंने कहा कि ये बसें रात में गांव में ही रुकेंगी और सुबह ब्लॉक व तहसील होते हुए पूर्वाह्न 10 बजे तक जनपद मुख्यालय तक पहुंचेंगी।

परिवहन मंत्री ने बताया कि बसें पूर्वाह्न 10 से शाम चार बजे तक चलेंगी। उन्होंने कहा कि इन बसों के ड्राइवर, कंडक्टर व क्लीनर आसपास के गांव के लोग ही होंगे, जिससे रात में गांव में रुकने और सुबह आने में उन्हें परेशानी नहीं होगी। परिवहन मंत्री ने बताया कि जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित कमेटी स्थानीय स्तर पर किराया निर्धारित करेगी और टिकट सस्ता होगा। उन्होंने कहा कि इन बसों को परमिट की आवश्यक्ता नहीं होगी, जिसकी वजह से बस चलाने वालों को लाभ होगा। सिंह ने कैबिनेट बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत में बताया कि उत्तर प्रदेश में अब ओला व उबर को भी पंजीकरण कराना होगा। परिवहन मंत्री ने मोटर वाहन अधिनियम 1988 की धारा 93 का जिक्र किया और बताया कि भारत सरकार ने एक जुलाई 2025 को नियमावली में संशोधन किया था। उन्होंने कहा कि भारत सरकार के नियम को उत्तर प्रदेश भी अपनाएगा। सिंह ने कहा कि ओला-उबर पर पहले नियंत्रण नहीं था, लेकिन अब इन्हें भी पंजीकरण कराना पड़ेगा।

उन्होंने कहा कि इन कंपनियों को आवेदन, लाइसेंस और नवीनीकरण शुल्क भी देना होगा और वाहन चालक की मेडिकल जांच, पुलिस सत्यापन तथा फिटनेस टेस्ट आदि भी कराए जाएंगे। परिवहन मंत्री ने बताया कि अब उत्तर प्रदेश में बिना पंजीकरण शुल्क, फिटनेस, मेडिकल टेस्ट, पुलिस सत्यापन के वाहन चलाने की अनुमति नहीं होगी। उन्होंने कहा कि अधिसूचना जारी होने के बाद यह नियम लागू हो जाएगा। सिंह ने बताया कि पंजीकरण के लिए आवेदन शुल्क 25 हजार रुपये होगा, जबकि 50-100 या इससे अधिक गाड़ी चलाने वाली कंपनी की लाइसेंसिंग फीस पांच लाख रुपये होगी। उन्होंने कहा कि हर पांच साल पर नवीनीकरण कराया जाएगा, जिसके लिए पांच हजार रुपये देने होंगे।

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