शिवनकुट्टी ने पुलिस के खिलाफ टिप्पणियों को लेकर पूर्व डीजीपी श्रीलेखा, सेनकुमार की आलोचना की
तिरुवनंतपुरम, शुक्रवार, 24 अप्रैल 2026। केरल के सामान्य शिक्षा मंत्री वी. शिवनकुट्टी ने पुलिस के बारे में कथित प्रतिकूल टिप्पणी के लिए शुक्रवार को पुलिस के पूर्व महानिदेशकों (डीजीपी) एवं (अब) भाजपा नेताओं -आर. श्रीलेखा और टी.पी. सेनकुमार- पर निशाना साधा। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के नेता शिवनकुट्टी ने यहां आयोजित संवाददाता सम्मेलन के दौरान दावा किया कि हाल में प्रदर्शन के दौरान दोनों पूर्व पुलिस महानिदेशकों ने ''पोडा पुल्ले पुलिस'' (दफा हो जाओ पुलिस) जैसी टिप्पणी की थी। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि श्रीलेखा ने तिरुवनंतपुरम शहर के पुलिस आयुक्त को धमकी दी और उसका स्क्रीनशॉट सोशल मीडिया पर पोस्ट किया।
उन्होंने सवाल किया, ''उन्हें ऐसा करने का क्या अधिकार है?'' उन्होंने यह भी तर्क दिया कि राजनीतिक क्षेत्र में प्रवेश करने पर, खासकर चुनाव लड़ते समय, पूर्व डीजीपी को अपने नाम के साथ आईपीएस (भारतीय पुलिस सेवा) शब्द का उपयोग नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि सेवाकाल के दौरान दोनों अधिकारियों द्वारा लिये गए महत्वपूर्ण निर्णयों की जांच होनी चाहिए। जवाब में श्रीलेखा ने कहा कि वह सेवाकाल के दौरान भी गलतियां करने वाले पुलिस अधिकारियों के खिलाफ इसी तरह की भाषा का इस्तेमाल करती थीं। उन्होंने कहा कि कई पुलिस अधिकारी, जिन्होंने गंभीर गलतियां कीं या भ्रष्टाचार में लिप्त थे, उन्हें सेवा से निलंबित कर दिया गया, कुछ को बर्खास्त कर दिया गया और कई अन्य पर भ्रष्टाचार के मामले दर्ज किए गए तथा उन्हें दोषी ठहराया गया, लेकिन किसी भी राजनीतिक या पुलिस संगठन के नेता ने उनके खिलाफ आवाज नहीं उठाई।
उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में दावा किया कि जब उन्होंने सेवानिवृत्ति के बाद गलती करने वाले एक अधिकारी के खिलाफ इस तरह के शब्दों का इस्तेमाल किया, तो लोग इसमें खामियां निकाल रहे हैं। उन्होंने हाल में वट्टियूरकावु थाने के अधिकारियों द्वारा भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कार्यकर्ताओं के खिलाफ कथित पुलिस हिंसा के विरोध में प्रदर्शन करते हुए इस शब्द का प्रयोग किया था। तिरुवनंतपुरम नगर निगम की पार्षद श्रीलेखा, राज्य के वट्टियूरकावु निर्वाचन क्षेत्र से नौ अप्रैल को हुए विधानसभा चुनावों में भाजपा की उम्मीदवार भी हैं।
शिवनकुट्टी ने आरोप लगाया, ''शहर की सड़कों पर कूड़े के ढेर लगे होने के कारण लोगों को चलते समय नाक और मुंह ढकना पड़ता है। प्लास्टिक कचरा इकट्ठा करने वाली हरित कर्म सेना कई जगहों पर ठीक से काम नहीं कर रही है, कचरा निपटान एक फोटो या वीडियो शूट का जरिया बन गया है, आवारा कुत्तों का आतंक बढ़ गया है और रात में शहर पूरी तरह अंधकारमय हो जाता है।'' उन्होंने कहा, ''निगम का संचालन करने वालों ने इसे लापरवाही का नमूना बना दिया है।'' मंत्री ने नगर निगम के महापौर वी.वी. राजेश के उस कथित बयान को भी ''हास्यास्पद'' करार दिया, जिसमें उन्होंने कहा था कि नगर निगम शहर की पेयजल समस्याओं के लिए जिम्मेदार नहीं है और यह जल प्राधिकरण की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा, ''महापौर का यह बयान अत्यंत गैर-जिम्मेदाराना है।''
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