प्रधानमंत्री ने परिसीमन से जुड़ी चिंताओं का समाधान नहीं किया, मतविभाजन में हारेगी सरकार: कांग्रेस

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नई दिल्ली, गुरुवार, 16 अप्रैल 2026। कांग्रेस ने बृहस्पतिवार को दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने लोकसभा में अपने वक्तव्य के दौरान परिसीमन से जुड़ी चिंताओं का समाधान नहीं किया और अब महिला आरक्षण संबंधी संविधान संशोधन विधेयक पर मत विभाजन के समय सरकार को हार का सामना करना पड़ेगा। पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने यह भी कहा कि पश्विम बंगाल और तमिलनाडु की जनता भी इस महीने विधानसभा चुनावों में जवाब देगी। रमेश ने 'एक्स' पर पोस्ट किया, ''अस्वाभाविक रूप से, 'गैर-गृहस्थ' प्रधानमंत्री ने आज लोकसभा में केवल 40 मिनट का भाषण दिया। विशिष्ट बात यह है कि उन्होंने संसद के विशेष सत्र में प्रमुख मुद्दे परिसीमन के अलावा हर मुद्दे पर बात की। उन्होंने इससे जुड़ी एक भी चिंता का समाधान नहीं किया।''

उनका कहना है, ''प्रधानमंत्री ने बार-बार दलगत स्थिति से ऊपर उठने और इन विधेयकों को सर्वसम्मति से पारित करने का आह्वान किया...प्रधानमंत्री ने दावा किया कि सरकार ने इस मुद्दे पर हर पक्ष से मुलाकात की है। सच तो यह है कि उसने (सरकार ने) 29 अप्रैल को तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में चुनाव प्रचार समाप्त होने के बाद सर्वदलीय बैठक बुलाने के विपक्ष के नेता के बार-बार के आह्वान को खारिज कर दिया है।'' उन्होंने दावा किया कि सरकार ने किसी भी राज्य सरकार से औपचारिक या अनौपचारिक रूप से परामर्श नहीं किया है, यहां तक ​​कि वह लोकसभा और विधान सभा दोनों स्तरों पर परिसीमन करने के लिए आगे बढ़ रही है।

रमेश का कहना है, ''परिसीमन कैसे आगे बढ़ेगा, इस बारे में सरकार ने प्रस्तावित कानून में कोई भी विवरण लिखित में देने से इनकार कर दिया है और इसके बजाय ऐसे विधेयक पेश किए हैं जो लोकसभा की संरचना को बड़े पैमाने पर फिर से बनाने की बात करते हैं।'' उनके अनुसार, कई मौजूदा मुख्यमंत्रियों और संसद सदस्यों द्वारा उठाए गए गंभीर मुद्दों को 'तकनीकी बहानेबाजी' करार देकर प्रधानमंत्री ने दक्षिण, पूर्व, पूर्वोत्तर और उत्तर के कई राज्यों की चिंताओं के प्रति जानबूझकर अनभिज्ञता दिखाई है। रमेश ने कहा, ''इन क्षेत्रों में लोगों की जायज चिंताओं को बेहद निर्मम तरीके से नजरअंदाज कर दिया गया है। तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल के लोग निस्संदेह इस महीने के अंत में वोट के जरिये इस अपमान का जवाब देंगे।''

कांग्रेस नेता ने कहा, ''प्रधानमंत्री ने आज अपने भाषण में अपनी जातीय पृष्ठभूमि का भी आसानी से जिक्र किया। लेकिन उन्होंने उस मुद्दे पर कोई बातचीत नहीं की जिसे विपक्ष लगातार उठाता रहा है। हमें अन्य पिछड़ा वर्ग की महिलाओं के लिए कोटा के भीतर एक कोटा लागू करना चाहिए। लेकिन प्रधानमंत्री इस मांग के प्रति जानबूझकर बहरे हैं, भले ही वह राजनीतिक लाभ के लिए अपनी पहचान का दिखावा करते हों।'' उन्होंने कहा, ''प्रधानमंत्री ने स्थानीय निकायों में महिलाओं के लिए आरक्षण के कारण देश भर की महिलाओं में आई राजनीतिक चेतना को भी परोक्ष रूप से स्वीकार किया। उन्होंने यह उल्लेख छोड़ दिया कि जमीनी स्तर पर यह क्रांति पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के दृष्टिकोण के कारण संभव हुई।''

कांग्रेस नेता ने कहा, ''महिलाओं के हित के प्रति कांग्रेस की प्रतिबद्धता को चुनौती नहीं दी जा सकती। लेकिन आज मुद्दा वह नहीं है। मुद्दा भारत के संविधान का है। संविधान को नष्ट करने और व्यवस्था पर कब्ज़ा करने के इस कुत्सित प्रयास में मोदी सरकार को निस्संदेह कल शाम चार बजे लोकसभा में हार का सामना करना पड़ेगा। विधेयक पेश होने पर मतों का विभाजन तो महज एक ट्रेलर था।'' प्रधानमंत्री मोदी ने देश में परिसीमन के अनुपात में कोई बदलाव नहीं होने का आश्वासन देते हुए बृहस्पतिवार को लोकसभा में सभी राजनीतिक दलों से महिला आरक्षण अधिनियम संबंधी संविधान संशोधन विधेयक को सर्वसम्मति से पारित करने की अपील की और कहा कि जो भी इसका विरोध करेंगे, उन्हें लंबे समय तक इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी।

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