न्यायाधीश ने कार्ति चिदंबरम की याचिका पर सुनवाई से खुद को अलग किया

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नई दिल्ली, मंगलवार, 28 अप्रैल 2026। दिल्ली उच्च न्यायालय की न्यायाधीश स्वर्णकांता शर्मा ने सांसद कार्ति चिदंबरम की उस याचिका पर मंगलवार को सुनवाई से खुद को अलग कर लिया जिसमें व्हिस्की की शुल्क मुक्त बिक्री पर प्रतिबंध के मामले में एक शराब कंपनी की कथित रूप से मदद करने को लेकर कांग्रेस नेता के खिलाफ दर्ज केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की प्राथमिकी रद्द किए जाने का अनुरोध किया गया है। न्यायाधीश ने कहा, ''इसे किसी अन्य पीठ के समक्ष सूचीबद्ध किया जाए।''

कार्ति ने मामले को रद्द करने का अनुरोध करते हुए उच्च न्यायालय में आरोप लगाया है कि एक जनवरी, 2025 को ''अवैध'' प्राथमिकी दर्ज की गई और इसे दर्ज करने में ''काफी देरी'' हुई तथा यह दुर्भावनापूर्ण, ''राजनीतिक प्रतिशोध और बदले की कार्रवाई'' से प्रेरित है। मामले को 21 जुलाई के लिए सूचीबद्ध किया जाएगा।

कांग्रेस सांसद के खिलाफ यह चौथा मामला है, जो 2018 में सीबीआई द्वारा दर्ज की गई प्रारंभिक जांच से उत्पन्न हुआ है। यह जांच कार्ति के पिता पी चिदंबरम के केंद्रीय वित्त मंत्री रहने के दौरान एफआईपीबी (विदेशी निवेश संवर्द्धन बोर्ड) मंजूरी देने में कथित अनियमितताओं से संबंधित है। यह मामला कटरा होल्डिंग्स, एडवांटेज स्ट्रैटेजिक कंसल्टिंग प्राइवेट लिमिटेड (एएससीपीएल), कार्ति और अन्य के खिलाफ दर्ज किया गया था। याचिका में आरोप लगाया गया है, ''यह प्राथमिकी दर्ज करने में काफी देरी हुई है, क्योंकि आरोप 2004-2010 की अवधि से जुड़े हैं, जबकि संबंधित प्राथमिकी 2025 में यानी 20 साल बाद दर्ज की गई।''

अधिवक्ता अक्षत गुप्ता के माध्यम से दायर याचिका में कहा गया है कि सक्षम प्राधिकारी की पूर्व मंजूरी लिए बिना अज्ञात लोक सेवकों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई, इसलिए इसे दर्ज किया जाना गैरकानूनी है और इस संबंध में कोई पूछताछ या जांच भी अवैध है। अधिकारियों ने पिछले साल नौ जनवरी को कहा था कि सीबीआई ने भारतीय पर्यटन विकास निगम (आईटीडीसी) द्वारा व्हिस्की की शुल्क मुक्त बिक्री पर लगाए गए प्रतिबंध के मामले में डियाजियो स्कॉटलैंड को कथित रूप से राहत दिलाने को लेकर कार्ति के खिलाफ मामला दर्ज किया है।

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